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..ताकि खिलें गुलदाऊदी के फूल

..ताकि खिलें गुलदाऊदी के फूल

वर्षा ऋतु आ चुकी है और गुलदाऊदी प्रेमियों के लिए यह एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण समय है। यदि आपके पास पिछले वर्ष के सकर्स सुरक्षित हैं तो आप उनकी कलम लेकर नए पौधे तैयार अभी ही करें, नहीं तो आप किसी नर्सरी से खरीद सकते हैं। इसके लिए आप एक गमले या पेटी में मोटी वाली बदरपुर बालू या नदी की मोटी वाली रेत भर दें। इसे एक दिन पूर्व अच्छा नम कर लें। सकर्स से तीन- चार इंच लम्बे कलम लें। कलम सदैव निरोगी स्वस्थ पौधे से ही लें। कलम के नीचे के पत्ते काट दें, ताकि वे मिट्टी, रेत से न छुएं और कलम बो दें। आप नियमित रूप से पानी देते रहें। आठ दिनों में ही कलम में से जड़ें निकल आएंगी। कलम को लगाने से पूर्व पायरेथ्रम अथवा कप्तान में डुबो कर कलम लगाएं।

जड़े निकल आने से इस पौधे को अलग करके 4 इंच के गमलों में लगा दें। गुलदाऊदी को कभी भी बड़े गमले में एकदम न लगाएं, बल्कि पहिले 4 इंच, फिर 6 इंच, उसके बाद 8 या 19 इंच के गमले में बदलें। गुलदाऊदी में जड़े का विकास बहुत तेजी से होता है और पोषक तत्त्वों की आवश्यकता भी उसी के अनुसार बढ़ती जाती है। इस प्रकार क्रमश: बदलने से जडमें के जाल को तोड़ कर नए सिरे से लगाया जाता है, जिससे जड़ों का जाल भी बनने नहीं पाता व पोषक तत्त्व भी आवश्यकतानुसार मिलते रहते हैं। एक गमले की खाद तैयार करने के लिए दो भाग गोबर की पुरानी खाद, एक भाग पत्ती की खाद, एक भाग गमलों से निकाली पुरानी मिट्टी, एक चम्मच नीम या कोई अन्य खली, एक चम्मच हड्डी का चूरा मिला दें। गमले में नीचे छेद पर ठीकरा रखें, फिर कम से कम एक इंच ठीकरा की तह बैठा कर दो-तिहाई गमला खाद से भर दें। पौध को निकाल कर फिर सावधानी से रख कर शेष खाद से दबा दें। प्रारम्भ में दो-तीन दिन छाया में रखें, पानी उतना ही दें कि गमला सूखा न रहे। फिर ऐसे स्थान पर रखें, जहां सुबह की दो-तीन घंटे की धूप तो मिले, परंतु दिन की तेज धूप से बचाव हो सके। दस से पंद्रह दिन के बाद तीसरी व अंतिम बार बड़े गमले में पौध बदल कर लगाएं। जडमें के जाल को काट कर ही पौध लगाएं। गुलदाऊदी के गमले पक्के फर्श या फिर काले प्लास्टिक की चादर पर रखें, ताकि नीचे छेद द्वारा कीड़े न घुस सकें।

सप्ताह में एक बार तरल खाद अवश्य दें, परन्तु कली आने का समय आने पर तरल खाद बंद कर दें। गुलदाऊदी के बड़े फूल में कम संख्या या मात्र एक लेने से फूल का आकार बड़ा हो जाता है। अत: टहनी के अग्रभाग व पत्तियों के जोड़ में निरंतर निकलते रहने वाली कलियों को तोड़ देना चाहिए। कलियां नोचने का कार्य सुबह के समय करना चाहिए। इस समय टहनी सख्त होती है और कलियां नोचने का कार्य आसान हो जाता है।

गुलदाऊदी का दूसरा मुख्य कार्य उनमें सहारे के लिए खपच्ची लगाना होता है। यह खपच्ची लगाना अत्यन्त आवश्यक कार्य होता है। चूंकि गुलदाऊदी की टहनी नरम होती है और फूल बडम व भारी, इसलिए खपच्ची लगाने का कार्य कली आने के पूर्व ही कर देना चाहिए। बांस की पतली खपच्ची को पौधे की जड़ से बचाते हुए थोड़ा दूर गाड़ देना चाहिए। अच्छा हो यदि खपच्ची को हरे रंग में रंग दें। इसलिए दीमक भी नहीं लगती व खपच्ची टहनी के साथ मिल जाती है। खपच्ची को कस कर न बांधें, बल्कि थोडम ढीला ही रखें ताकि पौधे में खिंचाव न हो।

गमले में खुदाई निरन्तर करते रहें। उसके साथ ही नीम अथवा सरसों की खली चूरा करके गमले में किनारे की ओर मिट्टी में मिला दें। अच्छा तो यही रहेगा कि गोबर की खाद व खली को दस दिन पूर्व घोल कर रख दें और उसी की तरल खाद पोटाश व सिंगल सुपर फास्फेट के साथ पौधों को दी जाए। पानी देते समय पानी की फुहार फूलों पर न पड़ने दें। फूल खिलने पर गमले को थोड़ा घुमाते रहें, ताकि सूर्य की किरणें समान रूप में पड़े। फूल की समाप्ति के बाद पौधे के पास निकलने वाले सकर्स को संभाल कर अगले वर्ष के लिए रखें।

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