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पाक ने सौंपे मुंबई हमलों के ताजा दस्तावेज

पाक ने सौंपे मुंबई हमलों के ताजा दस्तावेज

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके पाकिस्तानी समकक्ष युसूफ रजा गिलानी के बीच गुरुवार को मिस्र में होने वाली मुलाकात से पहले पाकिस्तान ने मुंबई आतंकी हमलों की जांच के सिलसिले में भारत को नये दस्तावेज सौंपे है।

जानकार सूत्रों ने कहा कि शनिवार को इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को सौंपे गये दस्तावेज में 12 नये संदिग्धों की पहचान की गयी है और 26 नवंबर के आतंकी हमलों के मामले में पाकिस्तान की जांच में ताजा जानकारी दी है।

सिंह ने इस संबंध में जानकारी दी कि शनिवार को आईएसआई प्रमुख ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के कुछ अधिकारियों से मुलाकात की थी। इसके बाद वार्ता प्रक्रिया में आईएसआई के प्रभाव को लेकर अटकलें शुरू हो गयीं। भारतीय पक्ष इस बात का अनुमान नहीं लगाना चाहता कि वार्ता में आईएसआई भाग लेगी या नहीं।

फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेने और राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी से बातचीत के लिए दो दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचे सिंह मिस्र के लिए रवाना होंगे। वह वहां गुटनिरपेक्ष आंदोलन (नैम) की शिखरवार्ता में भाग लेंगे और इसके इतर वह गिलानी से मुलाकात करेंगे।

प्रधानमंत्री गुरूवार को शर्म अल शेख के होटल मारितिम जोली विले गोल्फ रिसार्ट में गिलानी से इस उम्मीद के साथ मुलाकात करेंगे कि पाकिस्तान की तरफ से मुंबई आतंकी हमलों के आरोपियों को जल्दी ही न्याय के कठारे में लाने और भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में पाकिस्तानी सरजमीं का इस्तेमाल नहीं होने देने की प्रतिबद्धता जताई जाएगी।

सिंह और गिलानी के बीच मुलाकात से पहले विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और उनके पाकिस्तानी समकक्ष सलमान बशीर की मुलाकात होगी। दोनों के बीच पहली मुलाकात मंगलवार को होगी और बाद में वे अपने संबंधित नेताओं को इसकी जानकारी देंगे।

भारतीय पक्ष हालांकि सावधानी से बातचीत में शामिल हो रहा है। सूत्रों ने कहा कि भारत ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की उस इच्छा को संज्ञान में लिया है, जिसमें उन्होंने सिंह से पिछले महीने रूस में मुलाकात के दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर चर्चा की इच्छा जताई थी।

नई दिल्ली का यह भी मानना है कि पाकिस्तान ने इस दिशा में कुछ कदम उठाए हैं। साथ ही कहा है, लेकिन किस हद तक उठाए गये हैं यह हमें देखना होगा। भारत ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान को आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करने और आतंकी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए और कदम उठाने चाहिए।

नई दिल्ली का मानना है कि इस मकसद से समयसीमा तय करना व्यावहारिक नहीं होगा। भारतीय पक्ष का यह भी मानना है कि शांति प्रक्रिया की बहाली के बारे में इस समय अटकलें लगाना जल्दबाजी होगी। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया मुंबई हमले के बाद से रूकी पड़ी है। भारतीय पक्ष का यह भी मानना है कि फिलहाल वह पाकिस्तान के साथ समग्र बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने के बारे में न तो हां कह सकता है और न ही ना।

सूत्रों के मुताबिक भारत इस बात से नाखुश है कि मुंबई हमलों को आठ महीने बीत जाने के बाद भी पाकिस्तान की ओर से आरोपियों के खिलाफ अभियोग चलाने की प्रक्रिया धीमी और हताशाजनक है। मामले के एक प्रमुख आरोपी और लश्कर के ऑपरेशन कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी के खिलाफ मामले की सुनवाई तीसरी बार 18 जुलाई तक के लिए टाल दी गई है क्योंकि किसी न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं हुई है।

मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ता और लश्कर संस्थापक एवं जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद की रिहाई से भी भारत नाखुश है। सईद को दो जून को लाहौर उच्च न्यायालय के आदेश के बाद रिहा किया गया था। भारत इसे गंभीर मुद्दे के तौर पर देखता है और पुरजोर इस बात को मानता है कि पाकिस्तान आतंकवाद भड़काने वाले किसी भी शख्स को पकड़ने के लिए बाध्य है।

गिलानी ने महत्वपूर्ण मुलाकात से पहले मुंबई आतंकी हमलों के मामले में पाकिस्तान की तरफ से हो रही जांच का जायजा लिया। उन्होंने आंतरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक से मुलाकात की और उन्हें हमलों की जांच के बारे में जानकारी दी।

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