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मेट्रो हादसा: क्या पुल के डिजाइन में ही खोट है

मेट्रो हादसा: क्या पुल के डिजाइन में ही खोट है

मेट्रो की जमरुदपुर साइट पर रविवार सुबह मेट्रो पुल ढहने से जो हादसा हुआ उसके लिए आरंभिक तौर पर पुल के निर्माण में जुटी कंपनी गेमन द्वारा तैयार किए गए डिजाइन को हादसे का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। मेट्रो हादसे की जांच में जुटी टीम ने घटना स्थल पर सोमवार को जो आरंभिक तथ्य जुटाए हैं उनसे यह खुलासा हुआ है। जांच टीम ने पाया कि ढाई महीने पूर्व इस साइट पर मेट्रो इंजीनियरों की सलाह पर काम रोक दिया गया था। इसकी वजह यह थी कि साइट इंजीनियरों को पुल के डिजाइन के स्वरूप पर शक पैदा हुआ था।

हादसे के 36 घंटे के बाद कुछ पिलरों पर दोषपूर्ण डिजाइन के नए तथ्य सामने आ रहे हैं। लाजपत नगर से जमरूदपुर व ग्रेटर कैलाश के बीच गेमन द्वारा डिजाइन कराए गए कुछ और पिलरों पर जांच टीम की निगाह लगी हुई है, इनके डिजइन पर साइट इंजीनियरों ने शुरुआती सवाल उठाए थे।

सूत्रों का कहना है कि रविवार तड़के जो हादसा हुआ उसमें पुल के डिजाइन में कैंटिलीवर का एक हिस्सा अनावश्यक रूप से बाहर निकला हुआ था, जिस पर साइट इंजीनियरों की निगाह गड़ी थी। इसका विश्लेषण करने के बाद ही मेट्रो इंजीनियरों ने डिजाइन की पड़ताल के बाद अप्रैल में काम रोकने का दबाव बनाया था।

सूत्रों का कहना है कि डिजाइन का मामला पड़ताल के लिए ऊपर यानी श्रीधरन तक गया, उन्होंने खुद डिजाइन का आंकलन किया और उनकी ओर से ओके होने के कुछ दिन बाद ठेकेदार कम्पनी गेमन ने पुल निर्माण का काम आगे बढ़ा दिया। हालांकि जांच पड़ताल में खुल रही परतों में ये बातें भी सामने आ रही हैं कि पुल व पिलर डिजायनों का काम गेमन खुद नहीं बल्कि किसी बाहरी कंपनी से करवाती है।

दिल्ली मेट्रो के सूत्रों का कहना है कि वास्तव में जो भी हादसा हुआ, वह किसी की व्यक्तिगत चूक नहीं बल्कि ‘सिस्टमेटिक फेलियर’ के रूप में देखी जानी चाहिए क्योंकि जो भी काम हो रहा है, वह एक चेन की तरह हो रहा है और उसमें चेन की एक कड़ी को जिम्मेदार ठहराना काफी मुश्किल है।

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