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जी-8

यह उत्तरी गोलार्ध के आठ देशों का समूह है। जी-8 का गठन विश्व की सात औद्योगिक शक्तियों कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जपान, ब्रिटेन, अमेरिका तथा रूस से मिलकर हुआ है। इसके नेताओं की प्रतिवर्ष बैठक होती है।

इतिहास : 1973 की तेल आपदा और ग्लोबल मंदी ने इस समूह के गठन की नींव रखी। 1975 में फ्रांस के राष्ट्रपति गिकार्ड डीस्टिंग ने एक बैठक बुलाई। इसमें पश्चिमी जर्मनी, इटली, जपान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हुए थे। बैठक में यह फैसला हुआ कि सालाना एक बैठक का आयोजन किया जाएगा और प्रत्येक देश बारी-बारी से इस बैठक की मेजबानी करेगा। उस वक्त यह ग्रुप-6 हुआ करता था। उसी वर्ष कनाडा के इसमें शामिल होने से सदस्य देशों की संख्या सात हो गई। 1998 में ब्रिटेन के बíमंघम में हुई बैठक में आधिकारिक रूप से रूस इस संगठन में शामिल हुआ और इसका नाम बदलकर जी-8 हो गया।

संरचना : जी-8 का स्थाई सचिवालय नहीं है। मिनिस्ट्रयल बैठक में वश्विक स्तर के मुद्दों की चर्चा होती है जैसे स्वास्थ्य, कानून, श्रम, ऊर्जा, पर्यावरण, न्याय, आतंकवाद और व्यापार। जी-आठ के सदस्य नीतियों और उद्देश्यों की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उनके बीच सहमति होनी जरूरी है। पिछली बैठकों में फ्रांस और ब्रिटेन ने समूह के विस्तार की बात पर बल दिया। विस्तारीकरण के तहत पांच विकासशील देशों को शामिल करने की अनुशंसा की गई। जी-8 की 2003 की बैठक में पहली बार भारत, ब्राजील, चीन, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका भी शामिल हुए। हाल में फ्रांस, इंटली और जर्मनी ने बैठक में मिस्र को शामिल करने की बात की है।

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