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बारिश के दौरान..

मॉनसून के मौसम में मच्छर पनपने के कई कारण हैं क्योंकि इस मौसम में कई स्थानों पर पानी जमा हो जाता है जिनमें मच्छर के पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए यदि किसी जगह पर सात दिनों से अधिक पानी इकट्ठा रहता है तो वह वायरस पैदा होने का आदर्श स्थान बन जाता है।

वायरस से ग्रस्त मच्छर द्वारा काटे जाने के बाद संक्रमण के लक्षण तीन से सात दिनों तक रहते हैं। 4 से 7 दिनों के पश्चात एकदम से फ्लू जैसे लक्षण सामने आते हैं, जैसे: बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, उबकाई, उल्टी, जोड़ों में तेज़ दर्द, चकत्ते आदि। इस रोग को रोकने का एकमात्र प्रभावी तरीका है और वह है प्रभावशाली तरीके से मच्छरों की पैदाइश को रोकना। इसके लिए जो भी ज़रुरी कदम हैं वे हमें उठाने चाहिए।

- छतों आदि पर जमा पानी को नियमित अंतराल में साफ करते रहें ताकि ठहरे हुए पानी में मच्छर पैदा न हो सकें।

- पानी की टंकी को ढक कर रखें और कूलर का पानी प्रतिदिन बदलें।

- पुराने टायर, गमले, डब्बे आदि जिन भी चीज़ों में पानी जमा हो सकता है उन्हें ठिकाने लगाना जरूरी होता है।

- सूती कपड़ों से पूरे शरीर को ढक कर रखें।

- बाजार में कटे और खुले पदार्थो का सेवन न करें।

- हमेशा घर में मच्छर मारने की टिकिया आदि का प्रयोग करें। ध्यान रखें कि इसका इस्तेमाल सीमा में ही हो।

- शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएं।

- सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।

- घर या उसके आसपास जहां पानी इकट्ठा हो वहां मिट्टी का तेल या डीडीटी का छिड़काव करें। इस दिशा में प्रशासन की भी मदद लें।

- बुखार लंबा होने पर लेटलतीफी न करें और किसी कुशल फिजिशियन को दिखाएं।

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