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तब क्यों चुप थे जार्ज

जार्ज फर्नाडीस के टिकट कटने के मुद्दे पर जमकर बबाल मचा हुआ है। ऐसे में पुराने समाजवादी नेता व पूर्व सांसद मंजयलाल की टिकट कटने का मुद्दा फिर से जीवित हो गया है। मंजयलाल समस्तीपुर से जदयू के ही सीटिंग एमपी थे और पिछले चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया गया था। तब यही तर्क दिया गया था कि वे वृद्ध हो गए हैं। आराम करं और पार्टी को अपने विचारों से समृद्ध करते रहें। मंजयलाल के पुत्र पूर्व विधान पार्षद अलमस्त तो यहां तक कहते हैं कि यह सुनकर वे सभी सन्न रह गए थे, क्योंकि ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता था। कई लाख के पोस्टर तक छपवा लिए गए थे। टिकट देने या काटने की हैसियत तो सिर्फ जार्ज में ही थी। उस समय क्यों चुप रह गए?ड्ढr ड्ढr टिकट मिला नहीं कि पत्ता साफड्ढr सपा में दो धड़े में लड़ाई क्या हुई, पार्टी की दुकान ही बंद हो गई। अब तो कोई झांकने तक नहीं आ रहा। सबसे बुरी स्थिति तो अररिया के भाजपा सांसद सुखदेव पासवान की हुई। कल तक वे सपा टिकट पर भाजपा समेत विरोधियों को पटकनी देने के लिए ताल ठोक रहे थे और अब अचानक पूरी पार्टी की बत्ती ही गुल हो गई है। अब दोनों धड़े के नेता और कार्यकर्ता घर बैठ गए हैं और मित्रों से भी बचते नजर आ रहे हैं। दबी जुबान से इस निर्णय की प्रशंसा भी कर रहे हैं।ड्ढr ड्ढr बेचार बुर फंसेड्ढr सारण प्रमंडल की अपनी परम्परगत सीट से उम्मीदवारी की चाहत ने कांग्रस के एक मजूबत कद्दावर नेता की भी नींद जदयू के बागी नेता की तरह ही उड़ा दी है। जदयू के बागी नेता ने तो अपनी पहचान को बरकरार रखते हुए पड़ोसी राज्य से ही सही सीट तो हथिया ली। पर कांग्रस के दमखम वाले ये नेता कुछ निर्णय नहीं कर पा रहे। दरअसल उनके पुराने सहयोगी दल ने भी उन्हें लिफ्ट नहीं दिया है। अब करं तो क्या कर, यह सोचकर सिर्फ वे ही नहीं, उनके समर्थक भी परशान हैं जिन्होंने उन्हें केन्द्रीय नेतृत्व के खिलाफ कभी बोलने का साहस जुटाया था।ं

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  • Web Title: बाकी सब बकवास