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शहर के किसी भी पब्लिक स्कूल नहीं दिया टैक्स

शहर के पब्लिक स्कूल नोट छापने वाली मशीन से किसी भी कीमत पर कम नहीं है। बावजूद इसके निगम को भवन कर के रूप में  टैक्स देने में स्कूलों को परहेज है। अभी तक शहर के किसी भी पब्लिक स्कूल ने टैक्स नहीं दिया है। निगम के स्तर से अभी नोटिस, पैमाइश, सुनवाई तक ही निगम की कार्रवाई थमी हुई है। कोई पैमाइश में दिक्कत पेश कर रहा है, तो किसी ने निगम को नोटिस के जवाब में कोर्ट में खींच लिया है।


अभी तक शहर के डेढ़ सौ से अधिक पब्लिक स्कूल में से दो दर्जन के करीब स्कूलों की ही पैमाइश हो पाई है। इसमें भी अधिकांश निगम के नोटिसों के खिलाफ कोर्ट पहुंच गए हैं। इस खींचतान के चलते निगम किसी से भी टैक्स नहीं वसूल पाया है। निगम को इन स्कूलों से टैक्स एक अप्रैल वर्ष 2008 से वसूलना है। ऐसे में एक साल गुजरने के बावजूद निगम अभी तक टैक्स वसूलने की पहली पायदान पर ही खड़ा है। टैक्स को लेकर निगम को चूना लगाने वाले ये सभी संस्थान निगम पर टैक्स में रियायत को पूरा राजनीतिक दबाव भी बनाए हुए हैं। इसी दबाव के कारण निगम स्तर से ही टैक्स की बढ़ी हुई दरों को लेकर पार्षदों ने विरोध शुरू किया। हालांकि मेयर विनोद चमोली ने साफ कर दिया है कि टैक्स वसूली को किसी भी कीमत पर हल्के में नहीं लिया जाएगा। किसी से भी टैक्स अधिक नहीं लिया जा रहा, बल्कि पहली बार टैक्स को लेकर फामरूला निकाला गया है। ऐसे में किसी को भी शिकायत का मौका नहीं दिया जा रहा।

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