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यूपी से उत्तराखंड गए सचिवालयकर्मी जूनियर हो जाएंगे!

यूपी से उत्तराखंड सचिवालय भेजे जाने वाले मूल निवासियों के सामने जूनियर्स का जूनियर बनने का खतरा पैदा हो गया है। उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 के तहत देहरादून भेजे जाने की प्रत्याशा वाले इन कर्मियों के समर्थन में उत्तर प्रदेश सचिवालय राजपत्रित अधिकारी संघ ने मुख्य सचिव से मिलकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। मुख्य सचिव अतुल गुप्ता ने भी इन आपत्तियों से सहमत होकर भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय को पत्र भेजकर दोनों राज्यों के बीच हस्तक्षेप करने को कहा। इसके बावजूद केन्द्र सरकार के ठंडे रुख से यहाँ के कर्मचारी नाराज हैं।

यूपी सचिवालय के एक अनुभाग अधिकारी ने अपनी तकलीफ बयां करते हुए बताया कि उत्तराखंड में बीती 22 जून को उत्तराखंड सरकारी सेवा ज्येष्ठता नियमावली-2009 में ऐसी गड़बड़ियां कर दी गई हैं जिससे यहां से उत्तराखंड जने वाले कर्मियों के लिए मुसीबत हो गई है। इसमें कहा गया है कि उत्तराखंड अलग होने के बाद लखनऊ सचिवालय में काम करने वालों को भले ही ऊँचे पद व वरिष्ठता मिल गई हो पर देहरादून में उन्हें नौ नवम्बर 2000 की तैनाती के हिसाब से ही पद मिलेगा। उनका कहना है कि इससे लखनऊ सचिवालय से जाने वाले करीब डेढ़ सौ अधिकारियों को अपने से कहीं ज्यादा जूनियर कर्मियों का जूनियर बनना पड़ेगा। यह वह अधिकारी हैं जो मूलत: उत्तराखंड के निवासी हैं।


इस मामले में उत्तर प्रदेश सचिवालय राजपत्रित अधिकारी संघ ने मुख्य सचिव को शिकायती पत्र देकर मांग की थी कि अगर उनकी वरिष्ठता के आधार पर तैनाती नहीं दी जाती है तो कार्मिकों का अंतिम आंवटन न किया जाए। इसके अलावा यह मांग भी की गई थी कि भारत सरकार के स्तर पर उचित निर्णय न होने पर उन विकल्पधारी सचिवालय कर्मियों को भी पद सहित वापस बुला लिया जाए जो फिलहाल उत्तराखंड में प्रोविजनल तौर पर काम कर रहे हैं। उनका आरोप है कि उत्तराखंड में जो नियमावली लागू की गई है उसमें नियमों की खुली अनदेखी की गई है। इस शिकायती पत्र के अध्ययन के बाद मुख्य सचिव ने भी भारत सरकार को हस्तक्षेप करने के लिए पत्र भेजा। इस पत्र के मद्देनजर बीती 10 जुलाई को दिल्ली में एक बैठक हुई। उसमें कार्मिक मंत्रालय की ओर से आए उपसचिव पेडुन्ना के सामने यूपी के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्या रखी पर उन्होंने कोई आश्वासन नहीं दिया। अधिकारी संघ ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात में लखनऊ सचिवालय के कर्मचारी उत्तराखंड जाने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने मांग की है कि दोनों राज्यों के बीच नए सिरे सचिवालय कर्मियों का आवंटन हो या फिर उनके साथ पूरा न्याय किया जाए नहीं तो वह लोग अदालत का सहारा लेंगे।

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