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संयुक्त वैवाहिक संपत्ति अधिकारों पर कानून बनाने का विचार

संयुक्त वैवाहिक संपत्ति अधिकारों पर कानून बनाने का विचार

सरकार संयुक्त वैवाहिक संपत्ति अधिकारों का मुद्दा विधि आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग के पास भेजेगी ताकि इस सिलसिले में एक समुचित कानून बनाया जा सके।
   

राज्यसभा में सोमवार को विधि एवं न्याय मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने बताया कि वर्तमान में संयुक्त वैवाहिक संपत्ति अधिकार संबंधी निजी कानूनों से शासित किए जाते हैं। मोइली ने मार्क्सवादी वृंदा कारत प्रश्न के उत्तर में बताया कि तलाक के दौरान संयुक्त वैवाहिक संपत्ति के निपटारे का प्रावधान संबंधित निजी कानूनों में है और कुछ मामलों में इस पर रूढ़ियां और प्रथाएं हावी रहती हैं। उन्होंने बताया कि विवाह के बाद संपत्ति पर पति और पत्नी  दोनों का समान अधिकार रहने तथा महिलाओं को पुरूषों के समान अधिकार दिए जाने का मुद्दा विधि आयोग तथा राष्ट्रीय महिला आयोग के पास भेजा जाएगा मोइली ने कहा हमें महिलाओं को संयुक्त वैवाहिक संपत्ति में बराबर का अधिकार देने के बारे में गंभीरतापूर्वक विचार करने की जरूरत है। मैं इस अवधारणा से सहमत हूं। वृंदा ने जानना चाहा था कि आजादी के 62 वर्ष बाद भी महिलाएं संयुक्त वैवाहिक संपत्ति के अधिकार से वंचित क्यों हैं?
   

मोइली ने कहा कई बार हमने यह महसूस किया है कि  हमारे कानूनों में लैंगिक भेदभाव है। कई कानूनों में लैंगिक असमानता साफ परिलक्षित हुई है। कांग्रेस की प्रभा ठाकुर ने पूछा कि जिस तरह गोवा में महिलाओं को संपत्ति में बराबर का अधिकार दिया जाता है क्या उसी तरह केंद्र सरकार कोई कानून बनाने पर विचार कर रही है। इस पर मोइली ने कहा कि कुछ राज्यों में महिलाओं को संपत्ति में बराबर का अधिकार दिया गया है लेकिन यह राज्यों के कानून हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार विचार करेगी क्योंकि ऐसे कानून बनाने में कई दिक्कतें पेश आती हैं। भाजपा के एम रामा जोइस के पूरक प्रश्न के उत्तर में मोइली ने कहा कि समय आ गया है जब समग्र दृष्टिकोण अपनाते हुए हमें तमाम विरोधाभासों को दूर करना होगा।

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