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सामूहिक विवाह के दौरान प्रेग्नेंसी टेस्ट ने तूल पकड़ा

सामूहिक विवाह के दौरान प्रेग्नेंसी टेस्ट ने तूल पकड़ा

मध्य प्रदेश में सामूहिक विवाह के दौरान कथित रूप से लड़कियों के प्रेग्नेंसी टेस्ट का मामला  तूल पकड़ता जा रहा है। जहां राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है, वहीं राजनीतिक दलों ने इसकी काफी आलोचना की है। हालांकि राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी ने ऐसी किसी भी जांच से इंकार किया है।

बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले शहडोल में राज्य सरकार की योजना तहत कराए गए सामूहिक विवाह के दौरान जिला प्रशासन ने लड़कियों का प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया था ताकि इसका सबूत मिल सके कि वे गर्भवती तो नहीं हैं। लड़कियों की इस जांच को शर्मनाक करार देते हुए कांग्रेस और सीपीएम ने इसे अमर्यादित एवं लड़कियों के सम्मान पर आघात बताया है।

कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने कहा कि इस प्रकार लड़कियों का शारीरिक जांच बेहद संवेदनशील विषय है और किसी भी सरकार को ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए, जिससे किसी के सम्मान पर आघात लगे। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां ऐसी होनी चाहिए जिससे लोगों को फायदा हो।

सीपीएम की नेता वृंदा करात ने भी कहा कि किसी भी लड़की का प्रेग्नेंसी टेस्ट कराना गलत और अमर्यादित है। ऐसी जांच बच्चियों के मान-सम्मान पर हमला है। इस पर तुरंत रोक लगाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह लड़कियों के मान-सम्मान से जुड़ा मसला है।

जब बीजेपी की नजमा हेपतुल्ला से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा,'ऐसे आरोप गलत हैं और इसमें कोई आधार नहीं है। मुख्यमंत्री ने ऐसी किसी घटना से इंकार किया है और जिला कलेक्टर की रिपोर्ट में इस बात को खारिज किया गया है।' उन्होंने कहा, 'प्रदेश सरकार गरीब बच्चियों की शादी कराने की योजना पर अमल कर रही है और किसी भी बच्ची की कोई शरीरिक जांच नहीं की गई। यह केवल मीडिया की उपज है। मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।'

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