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हादसे के बाद मौके पर मेट्रो ,फायर,आपदा प्रबंधन तथा पुलिस अधिकारी सहित अन्य विभागों के अधिकारी व अत्याधुनिक मशीनें व उपकरण मौजूद थे। लेकिन यह कैसी बिडम्बना है कि दो मजदूरों के शव 12 घंटे तक मेट्रो पिलर पर लटके रहे और एक मजदूर का शव नीचे मलबे में दबा था। शाम होने के बाद ही मजदूरों के फंसे शव निकाले ज सके जबकि तीसरे शव को निकालने का कार्य जारी था।

हादसे के समय पिलर नंबर 66 तथा 67 पर 30 मजदूर काम पर थे, लेकिन इनमें से 20 मजदूर पिलर के ऊपर कार्य कर रहे थे। सेगमेंट के गिरने पर सभी मजदूर घायल हो गए। इनमें से दो मजदूर पिलर के ऊपर ही फंस गए और उनकी मौत हो गई। जबकि एक मजदूर नीचे मलबे में फंस गया। मौके पर मौजूद सिविल डिफेंस के जवान राजीव ने बताया कि नीचे जो मजदूर फंसा था वह बचाव के लिए हाथ से इशारा कर रहा था। लेकिन आठ बजे के बाद उसकी तरफ से कोई गतिविधि नहीं दिखाई दी।
फायर अधिकारियों ने बताया कि शाम करीब सात बजे जकर पिलर पर फंसे एक मजदूर के शव को निकाला ज सका। इसके 15 मिनट बाद दूसरे मजदूर का शव निकाला गया।

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  • Web Title:12 घंटे तक लटके रहे शव