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राज्य के फैसलों में कोर्ट दखल नहीं दे सकता

राज्य के फैसलों में कोर्ट दखल नहीं दे सकता

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें उत्तर प्रदेश में अपने साथ दलित नेताओं व बसपा चुनाव चिन्ह हाथी की मूर्तियां लगाने की पूरी छूट दे दी है। कोर्ट ने कहा कि पार्को में मूर्तियां लगाने का फैसला राज्य सरकार का है। ऐसे मामलों में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के.जी. बालाकृष्णन और पी. सथशिवम की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए पार्कों में मायावती की मूर्तियां लगाने पर रोक लगाने का आग्रह ठुकरा दिया। पीठ ने कहा कि कोर्ट तभी हस्तक्षेप कर सकता है, जब सरकार भ्रष्टाचार कर रही हो या संविधान के विपरीत काम कर रही हो। सर्वोच्च अदालत, अधिवक्ता रविकांत की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

रविकांत ने शुक्रवार को एक और अर्जी दायर कर आरोप लगाया कि पार्कों में मूर्तियां लगाने के खिलाफ दायर उनकी याचिका पर 29 जून को राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा गया था, लेकिन सरकार इस समय का इस्तेमाल मायावती की मूर्तियां लगाने में कर रही है। लिहाजा जवाब आने तक सरकार को मूर्तियां स्थापित करने से रोका जाए। उप्र सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे, मायावती के करीबी सहयोगी वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र मिश्रा और राज्य के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल एस.के. द्विवेदी ने रविकांत की ताजा अर्जी पर कड़ा विरोध जताया।

गौरतलब है कि 29 जून को नोटिस जारी करते समय जस्टिस दलवीर भंडारी की अवकाशकालीन खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर मूर्तियां लगाने पर आ रहे भारी खर्च पर तीखी टिप्पणियां की थीं। लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने इस पर बिल्कुल अलग रुख अपनाया।

पर्यावरण मंत्रालय की कांशीराम संग्रहालय पर टेढ़ी नजर: केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की तीन सदस्यीय टीम ने नोएडा में मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट कांशीराम संग्रहालय व ओखला बर्ड सेंचुरी का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने माना कि संग्रहालय को बनाने के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया गया है और इसके बनने से बर्ड सेंचुरी भी तबाह हो गई है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन कहा कि वे आगामी सप्ताह में इसकी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप देंगे।

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