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ऑस्कर तो मिल गया, लेकिन पिंकी नहीं मुस्कुराई

ऑस्कर तो मिल गया, लेकिन पिंकी नहीं मुस्कुराई

प्रतिष्ठित ऑस्कर अवार्ड ने स्लमडाग मिलीयनेयर के बाल कलाकारों को झुग्गी-झोपड़ी से फ्लैट में पहुंचा दिया, लेकिन ‘स्माइल पिंकी’ की पिंकी मिर्जापुर के गांव में पहले की तरह भेड़-बकरी चरा रही है। पढ़ाई के नाम पर गांव के प्राइमरी स्कूल में खानापूरी ही कर रही है। जबकि अमेरिका रिटर्न उसका पिता फेरी लगाकर जामुन बेच रहा है।

याद है ना, ऑस्कर की घोषणा के बाद पिंकी के गांव रामपुर ढबही में देश-विदेश के बड़े-बड़े खबरनवीसों का जमघट लग गया था, और पिंकी रातोरात मीडिया में स्टार बन गयी थी। लेकिन आज वह गुमनामी के अंधेरों में गुम है। स्माइल पिंकी डाक्यूमेंट्री को ऑस्कर अवार्ड मिलते ही सरकार के कारिंदों, राजनीतिक तथा सामाजिक संगठनों ने पिंकी के उद्धार की घोषणाओं की झड़ी लगा दी थी। लेकिन अब कोई सुध नहीं ले रहा। दर्द बयां करते हुए पिंकी के पिता राजेन्द्र कहते हैं, यदि सामाजिक संस्थाएं मदद करतीं तो वह पिंकी को अच्छी शिक्षा दिलाते।

जिला प्रशासन ने पिंकी के गांव को गोद लेने की घोषणा की थी। इसके तहत गांव के गरीबों को आवास देने, गांव के हर मजरे की सड़क को पक्की कराने, पशुपालन खासकर बकरीपालन के लिए बैंक से गरीबों को ण दिलाने, बच्चों की पढ़ाई के लिए गांव के समीप स्कूल स्थापित करने, लाल व सफेद कार्ड दिलवाने, विद्युतीकरण करने तथा एएनएम सेंटर की दशा सुधरवाने का प्रस्ताव था। लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ। प्रशासन की तरफ से पिंकी के परिवार को एक महामाया आवास जरूर मिला है मगर इसकी न तो छत बनी है और न ही कमरे की फर्श। पिंकी के घर से उसके पुश्तैनी कुएं तक एक सड़क जरूर बनवाई गयी है। बाकी कामों के संबंध में चुनार के एसडीएम महेन्द्र राय ने बताया कि शासन से पैसा मिलने पर इसे कराया जाएगा।

इंडियन जस्टिस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदितराज पिंकी को चुनाव के दौरान अपनी पार्टी की वाराणसी और चंदौली की जनसभाओं में भी ले गये थे। उन्होंने उसे लालगंज स्थित बोर्डिग स्कूल में पढ़ाने का ऐलान किया था। चुनाव के बाद वे अपना वादा भूल गये। उन्होंने हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि वे तो पिंकी और उसके परिवार की खातिर काफी कुछ करना चाहते थे।

तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान से भी बात की थी। इसके लिए पिंकी और उसके पिता को दिल्ली बुलाया गया था, लेकिन वे नहीं आए। अगर पिंकी के परिवार वाले दिल्ली आकर उनसे संपर्क करते हैं तो पिंकी को बोर्डिग स्कूल में भेज दिया जाएगा। आदर्श पाषाण औद्योगिक उत्पादन सहकारी समिति ने पिंकी के पिता और उसके परिवार के सदस्यों के लिए 25 बीघा जमीन दिलवाने की घोषणा की थी मगर परिवार को अभी तक एक धूर भी जमीन नहीं मिली है। समिति के अध्यक्ष गणोश दत्त पांडेय का कहना है कि पट्टे की जमीन मिलनी है। अभी उसकी प्रक्रिया शुरू हुई है।

समिति सबसे पहले पिंकी के पिता राजेन्द्र और उसके परिवार के लोगों को सदस्य बनाएगी। तब जमीन के पट्टे के आवंटन का प्रार्थना पत्र दिया जाएगा। बताया कि समिति ने राजेन्द्र को मेम्बर बनाने का प्रस्ताव पास कर दिया है। अमर सिंह फैंस एसोसिएशन और मां विन्ध्यवासिनी सेवा समिति कोलकाता के अध्यक्ष विजय उपाध्याय ने आस्कर विजेता को उसके घर जाकर 25 हजार नकद दिए थे। संगठन ने पिंकी को पढ़ाने का प्रस्ताव रखा था जिसे परिवार के लोगों ने यह कहकर स्वीकार नहीं किया कि पढ़ाई की जिम्मेदारी किसी दूसरे ने ले ली है।

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