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उत्तर भारत में फिर बरसेंगे बादल

उत्तर भारत में कमजोर पड़ रहे मानसून के आने वाले कुछ दिनों में फिर से सक्रिय होने के आसार हैं। दरअसल, बंगाल की खाड़ी से दक्षिण-पश्चिमी हवाएं फिर से सैट होने लगी हैं। ये हवाएं हिमालय से टकराकर पुरवा हवाओं में तब्दील होकर उत्तर के मैदानी इलाकों में पहुंचने लगी हैं। इससे उम्मीद है कि 10-12 जुलाई के बीच में कमजोर पड़ा मानसून फिर से सक्रिय होगा।

ऐसा कभी नहीं होता कि मानसून एक बार पहुंचने के बाद लगातार सक्रिय रहा हो। बीच-बीच में उसका कमजोर पड़ना आम बात है। हां, इस बार उत्तर भारत में यह अपेक्षित रूप से सक्रिय होने से पहले ही कमजोर पड़ गया। लेकिन हमने इसकी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी। दरअसल, आइला तूफान की वजह से मानसून की बंगाल की खाड़ी वाली शाखा कमजोर पड़ी है, जिसका प्रभाव उत्तरी राज्यों पर पड़ा है। लेकिन यदि 15 जुलाई तक भी ठीकठाक बारिश उत्तरी राज्यों में हो जाती है तो मेरे विचार से फसलों को ज्यादा क्षति नहीं होगी।

आमतौर पर हमारी लघु अवधि की भविष्यवाणियां जो अगले तीन-पांच दिनों के लिए होती हैं, करीब 95 फीसदी तक सही बैठती हैं। मध्यम अवधि की जो 15 दिन से एक महीने की होती हैं, 80 फीसदी तक सही बैठती हैं। सिर्फ दीर्घकालिक भविष्यवाणी जो दो महीने या इससे ज्यादा समय के लिए होती हैं, कई बार सटीक नहीं बैठतीं, लेकिन तब भी उनके सही निकलने का प्रतिशत 60-65 के करीब रहा है।

दरसअल, हमारे देश में 127 कृषि जलवायु उप-संभाग और 36 संभाग हैं। हमारा देश विविध जलवायु वाला है, इसलिए मौसम का पूर्वानुमान एक बेहद जटिल प्रक्रिया है। मेरी नजर में इस मौसम पर ग्लोबल वार्मिग का कोई असर नहीं है।

अति. महानिदेशक मौसम विभाग

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