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मैं हूं अपने पापा की कार्बन कॉपी!

मैं हूं अपने पापा की कार्बन कॉपी!

दोस्तों, तुम देखते होंगे कि जो कलर तुम्हारे पेरेंट्स में किसी एक को पसंद है, वही रंग तुम्हारा भी खास है। पापा को अगर खाने में नॉन वेज में कुछ पसंद है तो तुम भी उसी डिश की ओर लपकते हो। तुम्हारे दादाजी को किताबें पढ़ने का बहुत शौक है। जब देखो कोई न कोई किताब उनके हाथों में होती है। बस तुम्हें भी वहीं से आदत लग गई पढने की। भले ही तुमने कॉमिक्स या कहानियों की किताबें पढ़ीं, लेकिन इससे फायदा तुम्हें अपनी स्टडी में भी मिला। दरअसल यही सब वे छोटी-छोटी बातें हैं, जिनकी वजह से हम कहते हैं कि तुम किसके जैसे हो, भले तुम्हारी शक्ल उससे न मिलती हो। इसके अलावा चलने व बात करने का तरीका। किसी दोस्त से मिलने-जुलने का तरीका व उठने-बैठने का स्टाइल। ऐसा भी होता है कि तुम्हारी किसी टीचर के पढ़ाने का स्टाइल तुम्हें बेहद पसंद होता है। अब जब कभी तुम किसी को कोई बात समझाने की कोशिश करते हो तो ठीक उसी तरह अपने हाथों को हिलाते हो। 

अधिकतर डॉक्टर अंकल का कहना है कि तुम्हारी आदतें और शक्ल का मिलना अनुवांशिकी भी होता है। जरूरी नहीं कि तुम्हारे अंदर तुम्हारे माता-पिता के ही गुण आएं, इसकी बजाए  तुम में अपने दादा-दादी, नाना-नानी, बड़े भाई-बहन के भी गुण आ सकते हैं। कुछ गुण तो तुम्हें अनुवाशिंकी तौर पर मिलते हैं, लेकिन कुछ तुम्हारे साथ जो लोग रहते हैं, तुम उनकी भाषा, संस्कार और तौर-तरीकों को अपना लेते हो। 

अगर तुम जानना चाहते हो कि हमारी कौन-कौन सी आदतें किस-किस से मिलती हैं तो उसके लिए लो एक नोटबुक। नोटबुक में सुबह जागने से लेकर रात को सोने तक सभी एक्टीविटीज को नोट करो। उसके बाद देखो कि वे कौन-कौन लोग हैं, जिनके तुम करीब हो। घर से लेकर स्कूल तक। स्कूल में अपने खास दोस्त या फिर टयूशन या पार्क में मिलने वाले अन्य साथी। इससे तुम्हें  अपनी अधिकतर आदतों का मेल पता लगेगा, वहीं खुद की बुरी आदतों की भी पहचान कर सकोगे।


सर्वे क्या कहते हैं..
सोशल साइंस एंड मेडिसन जर्नल में छपे एक सर्वे में महत्त्वपूर्ण बातें सामने आईं। 2,300 पेरेंट्स, जिनकी उम्र 20 से 65 और 2,700 बच्चे, जिनकी उम्र 2-18 थी, पर यह सर्वे किया गया था। सर्वे में पाया गया कि पेरेंट्स-किड्स की खानपान की आदतें बहुत कम मिलती थीं। हां छोटे बच्चों की आदतें अपने माता-पिता जैसी थीं। सर्वे में एक बात और सामने आई कि लड़कों की तुलना में लड़कियों की आदतें अपने पेरेंट्स से अधिक मेल खाती थीं।  स्टडी में यह बात भी सामने आई कि बड़े बच्चों की आदतों पर घर की बजाए बाहर का अधिक प्रभाव था। इसके अलावा टीवी ने उनकी आदतों पर गहरा असर डाला और यह भी कि स्वास्थ्यवर्धक भोजन से बच्चे दूर भाग रहे हैं।


डैड एंड आई लुक अलाइक
पिछले दिनों ने राजधानी में ‘डैड एंड आई लुक अलाइक कॉन्टेस्ट’ आयोजित किया गया। डीएलएफ प्रोमेंडा की ओर से  यह कॉन्टेस्ट रखा गया था। करीब 1 महीने चली इस प्रतियोगिता में फाइनल तक 38 प्रतियोगी पहुंचे। हालांकि 160 से अधिक आवेदन इस कॉन्टेस्ट के लिए आए थे। जीतने वालों के लिए इनाम को 3 कैटेगरीज में बांटा गया। पहला पुरस्कार हॉन्गकॉन्ग डिज्नी लैंड की सैर, दूसरा गोवा व तीसरा ईनाम मनीला की सैर था। प्रतियोगियों को जजेस के सामने परफॉर्म करना था। पहला राउंड रैम्प पर कैटवॉक करना था। दूसरा डैड व किड की  ग्रुप परफॉर्मेंस था। और अंत में दोनों को अलग-अलग अपने हुनर से जजेस का दिल जीतना था। प्रश्न- उत्तर राउंड में एक दूसरे के बारे में सवाल-जवाब का भी दौर चला। कॉन्टेस्ट का मकसद ही यह पता लगाना था कि वे कौन हैं, जो एक दूसरे जैसे हैं। चाहे बात शक्ल मिलने की हो, रैम्प पर बेहतर तालमेल के साथ वॉक करने की या फिर एक जैसे शौक के साथ एक दूसरे के बारे में अधिक से अधिक जानने की। ईवेंट में एक बात साफ तौर से सामने आई कि संगीत सबकी पहली पसंद बनता जा रहा है, क्योंकि यहां परफॉर्म करने वालों में 95 फीसदी जोडि़यों ने संगीत से जजेस को प्रभावित करने की कोशिश की। बच्चों के साथ सही तालमेल बिठाने में डैड भी कहीं पीछे नहीं दिखे, चाहे बालों को बच्चों की तरह कर्ली करने की रही हो या फिर सिर मुंडवाने की।

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