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दोस्ती की राह

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की रूस यात्रा इस मायने में सफल रही कि परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के मामले में कुछ तरक्की हुई और इस मायने में कुछ खास सफल नहीं रही कि रूस में ओबामा की यात्रा ज्यादा चर्चित नहीं हुई। ओबामा इस वक्त सारी दुनिया में सबसे ज्यादा लोकप्रिय राजनेता माने जाते हैं और वे जहां जहां भी गए हैं, लोगों में भारी उत्साह देखा गया है। ओबामा का जादू अगर रूसियों पर नहीं चला तो इसके कई राजनैतिक निहितार्थ हो सकते हैं। इसका एक मतलब तो यही है कि रूसी सरकार ओबामा की गर्मजोशी और दोस्ती की पहल को ज्यादा महत्व देने को तैयार नहीं हैं। अब भी रूसी मीडिया, खास तौर पर टीवी, सरकार के इशारे पर ही काम करता है और रूसी मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा को ज्यादा महत्व नहीं दिया। रूस में इन दिनों रूसी राष्ट्रवाद के थोड़े उग्र संस्करण का बोलबाला है और एक दोस्ताना अश्वेत अमेरिकी राष्ट्रपति की छवि इस राष्ट्रवाद के कार्यक्रम में ज्यादा फायदेमंद नहीं है। जॉर्ज बुश के संकीर्ण रिपब्लिकन एजेंडा ने रूसियों को भी संकीर्ण राष्ट्रवादी बनने को प्रोत्साहित किया और ब्लादिमीर पुतिन को भी यह काफी रास आता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि जमीनी स्तर पर रूस और अमेरिका में कोई भी तालमेल नहीं है। मध्य पूर्व में आतंकवाद की समस्या से दोनों देशों को दिक्कत है और यहां दोनों के बीच काफी तालमेल है।

परमाणु अस्त्रों के नियंत्रण को लेकर राष्ट्रपति ओबामा की पहल भी रूस के लिए फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि इसके जरिए रूस नाटो का दबाव कम करने पर जोर दे सकता है। रूस की मुख्य शिकायत रूसी प्रभाव क्षेत्र के कई छोटे देशों के नाटो की सदस्यता लेने के बारे में है। रूस को लगता है कि इस तरह उसे घेरने की कोशिश हो रही है। ओबामा ने यह स्पष्ट किया है कि वे नाटो और रूस को परस्पर सहयोगी मानते हैं। रूस के लिए दूसरी बड़ी उपलब्धि यह है कि अमेरिका-रूस समझोते में आक्रामक और रक्षात्मक रक्षा प्रणालियों में फर्क किया जाएगा, ऐसा तय हुआ है। अगर ओबामा रूसियों को यह आश्वस्त करने में कामयाब हो जते हैं कि वे रूस के प्रति आक्रामक नहीं हैं न ही उनका उद्देश्य रूस को घेरना है तो रूस मध्य-पूर्व एशिया में उनकी ज्यादा मदद कर सकता है। ओबामा लगातार यह सिद्ध करने में लगे हुए हैं कि वे बहुध्रुवीय विश्व के यथार्थ को समझ रहे हैं और अगर वे शंकालु रूसियों को भी अपनी सदाशयता पर भरोसा दिलवा सकें तो अगली बार शायद रूस में उनका वैसा ही स्वागत हो जसा बाकी दुनिया में होता है।

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