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साफ्टा समझौते के निरर्थक होने की चेतावनी

साफ्टा समझौते के निरर्थक होने की चेतावनी

क्षेत्र के व्यापार विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि दक्षिण एशियाई राष्ट्रों में द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के प्रति दिखाई जा रही रुचि से आने वाले समय में दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौता (साफ्टा) निरर्थक हो सकता है।

‘दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय एकता प्रबंध’ पर आयोजित सम्मेलन में हिस्सा लेने आए विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यद्यपि द्विपक्षीय एफटीए से दो पक्षों में व्यापार और निवेश बढ़ता है लेकिन कमजोर या छोटी अर्थव्यवस्थाओं को इसका सीमित फायदा होता है, क्योंकि बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से सौदेबाजी की उनकी क्षमता कम होती है।

समाचार पत्र ‘डेली स्टार’ ने बुधवार को कहा कि द्विपक्षीय एफटीए में प्रगति, बंगाल की खाड़ी बहुपक्षीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग जैसी पहलों का सामने आना, जिनमें दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के पांच से सात सदस्य देश शामिल हैं, ने साफ्टा की प्रासंगिकता पर संदेह पैदा कर दिया है।

क्षेत्र के विश्लेषकों का मानना है कि काफी बहस और विलंब के बाद वर्ष 2006 में लागू हुआ साफ्टा तेजी से बढ़ते द्विपक्षीय समझौतों के कारण आने वाले समय में निरर्थक साबित हो सकता है।

विश्लेषकों का कहना था कि भारत-श्रीलंका, भारत-नेपाल, भारत-भूटान और पाकिस्तान-श्रीलंका जैसे कई द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते अब साफ्टा पर प्रभावी हो रहे हैं।

 

 

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