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बेशक, इन्हें भी प्रशिक्षण की जरूरत है

बेशक, इन्हें भी प्रशिक्षण की जरूरत है

कामकाजी महिलाओं की बात चलने पर अक्सर घरेलू काम करने वाली औरतों को नजरंदाज कर दिया जाता है। घरेलू काम करने वाली यानी घर-घर काम करने वाली बाइयों को। चूंकि यह वर्ग किसी भी स्तर पर संगठित नहीं, इसलिए इनकी तरफ कोई ध्यान नहीं देता। प्रशासन से लेकर, गैर-सरकारी संगठन तक इनके अधिकारों के प्रति उदासीन ही रहते हैं। न तो इनका कोई वेतनमान है, न ही दूसरे क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं की तरह सुविधाएं। सामाजिक सुरक्षा की तो बात ही क्या है।

इन बाइयों को सशक्त करने का एक तरीका तो यह है कि इन्हें अपने काम में कुशल बनाया जाए। घर काम के बहुत प्रकार के हैं, जैसे खाना पकाना, बच्चों और बूढ़ों की देखभाल, साफ-सफाई- इन सब में उन्हें पारंगत किया जाए। उनकी क्षमता को बढ़ाने के लिए उन्हें प्रशिक्षित किया जाए। इस काम को करने के लिए दिल्ली सरकार ने अनोखी पहल की है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और  दिल्ली सरकार का श्रम और रोजगार मंत्रालय एक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने जा रहे हैं। इसका उद्घाटन पिछले शनिवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने किया। स्किल्स डेवलपमेंट इनीशिएटिव फॉर डोमेस्टिक वर्कर्स/हाउसहोर्ड एसिस्टेंट्स नाम के इस कार्यक्रम को फिलहाल दिल्ली और नोएडा तक सीमित रखा गया है। शुरुआत में इसके तहत 250 घरेलू कामगारों को प्रशिक्षित किया जाएगा। अगले पांच सालों में 10 लाख कामगारों को प्रशिक्षित करने का इनका इरादा है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि महिला सशक्तिकरण के अभियान में कमजोर तबके को नहीं भूलना चाहिए। यह कार्यक्रम इसी दिशा में की गई पहल है। यह प्रशिक्षण दो संस्थानों के माध्यम से दिया जाएगा- प्रयास तरुण सहायता सेंटर एवं संगठन, प्रयास बाल गृह (जहांगीर पुरी) और टीएमआई अकादमी ऑफ ट्रैवल एंड टूरिज्म (डिफेंस कालोनी)। इनके लिए अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के दिल्ली स्थित कार्यालय से 011-24602101 पर संपर्क किया जा सकता है। प्रशिक्षण हासिल करने के लिए केवल 200 रुपए जमा कराने होंगे। यह प्रशिक्षण 80 घंटे से लेकर 130 घंटे के बीच का होगा और किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसलिए इसे छुट्टी के दिन चलाया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद फीस के 200 रुपयों में से 100 रुपए वापस मिल जाएंगे। साथ ही घरेलू कामगार पंजीकृत हो जाएंगी। उन्हें स्किल कार्ड और सर्टिफिकेट दिए जाएंगे।

इस प्रशिक्षण के 10 हिस्से हैं। इनके अंतर्गत कामगारों को रोजमर्रा के घरेलू कार्यों के दौरान बुनियादी जानकारियों को पढ़ना और हिसाब करना सिखाया जाएगा। वे कैसे लोगों से बातचीत करें, फोन सुनें, मेहमानों का स्वागत करें, यह सब बताया जाएगा। उन्हें खुद को साफ रखना और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना आदि समझाया जाएगा। घर में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी को चलाना, उन्हें साफ करना, किचन-बाथरूम की सफाई, खाना पकाना, कपड़े धोना, राशन आदि लाना- उन्हें स्टोर करना, कचरे का निपटारा करना सिखाया जाएगा। इसके अलावा उन्हें बताया जाएगा कि घर और अपनी सुरक्षा कैसे करें। संकट में पड़ने पर वे किससे संपर्क करें।

कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल घरेलू कामगारों को सशक्त करना है, बल्कि लोगों को बेहतर सेवा प्रदान करना भी है। कार्यक्रम में शिरकत करने वाली वंदना अरोड़ा ने इसका स्वागत करते हुए कहा, ‘मैं चाहूंगी कि मेरे घर काम करने वाली बाई प्रभा, यह प्रशिक्षण ले। इससे उसे बेहतर तनख्वाह मिलेगी और मुझे बेहतर काम। मैं और निश्चिंत हो जाऊंगी।’ इस पर प्रभा ने कहा, ‘मैं और अच्छी तरह काम सीख जाऊंगी और बैंक वगैरह भी जाने लगूंगी।’ एक अन्य बाई अर्चना का कहना था, ‘मैं चाहती हूं कि मुझे सिर्फ खाना पकाने का काम मिले। उसमें ज्यादा इज्जत मिलती है। इस प्रशिक्षण के बाद मैं अच्छा खाना पकाना सीख जाऊंगी और किचन की देखभाल करना भी।’

 

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