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ऊर्जा भवन परिसर में बनेगा पहला डाटा बेस सेंटर

ऊर्जा भवन परिसर में राज्य का पहला डाटा बेस सेंटर बनने जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 45 करोड़ की धनराशि मंजूर कर दी है। बिजली महकमे के आला अधिकारी नौ जुलाई को केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों के समक्ष इस योजना का प्रजेंटेशन करेंगे। डाटा बेस सेंटर के अलावा बिजली सुधार के 85 करोड़ के कामों को भी मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है।


केंद्र की बिजली सुधार योजना आरएपीडीआरपी के तहत बिजली महकमा ऊर्जा भवन परिसर में राज्य भर के 13 लाख उपभोक्ताओं का लेखा-जोखा रखने के लिए डाटा बेस सेंटर का निर्माण करेगा। सेंटर के निर्माण के पीछे मुख्य मकसद यह है कि सूचना प्रौद्योगिकी के मार्फत इनर्जी एकाउंटिंग और आडिटिंग की जाए। डाटा बेस सेंटर में बिजली महकमे का अपना एक खास साफ्टवेयर होगा। जिसमें राज्य के वाणिज्यिक, घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं का लेखा-जोखा होगा। कंप्यूटर्स की एक पूरी श्रृंखला होगी। सेंटर का साफ्टवेयर मॉडम के जरिए राज्य भर के उपखंडों और खंडों में लगे कंप्यूटरों से जुड़ा रहेगा।


डाटा बेस सेंटर में बैठा अधिकारी किसी भी वक्त उसके साफ्टवेयर पर राज्य के किसी भी डिवीजन की रेवेन्यू, लाइन लास को चेक कर सकेगा। सर्वाधिक लाइन लास वाले डिवीजन को ऊर्जा भवन से ही अधिकारी निर्देशित भी कर सकेंगे। क्योंकि डाटा बेस सेंटर में सब कुछ आन लाइन होगा। आरएपीडीआरपी के डीजीएम जेएमएस रौथाण ने बताया कि नौ जुलाई को पहले चरण की बिजली सुधार की 135 करोड़ की योजना ऊर्जा मंत्रालय के सामने पेश की जाएगी।


इनसेट


क्या होंगे डाटा बेस सेंटर के फायदे
-इनर्जी की आडीटिंग और एकाउंटिंग में आएगी एक्यूरेसी
-राज्य के हर डिवीजन के राजस्व और लाइन लास की पोजीशन होगी आन लाइन
-उपभोक्ता की शिकायतों का जल्द होगा निवारण
-बिजली सप्लाई की उपलब्धता की पल-पल की होगी जानकारी
-ब्रेकडाउंस होने पर मौके पर तुरंत भेजे जा सकेंगे कर्मचारी

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