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क्यों बुलाते हो दंगा-फसाद के जिन्न को?

अलादीन के पास एक चिराग था और उसे घिसने पर उसमें से एक जिन्न निकलता था जो कि मालिक के अच्छे-बुरे कार्य कर देता था। आजकल के दौर में हमारी सियासी पार्टियां भी बोतल को ढूंढ़ने में लग जाती हैं, ताकि जिन्न बाहर निकले और उन पार्टियों का मतलब किसी तरह हल हो सके। हम देशवासी आजकल अमन-चैन से रह रहे हैं, कोई भी समझदार नहीं चाहता कि इस देश में दंगा फसाद हो। लिब्राहन आयोग का जिन्न बाहर निकालोगे तो फिर सियासत गरमाएगी फिर कई मासूम मरेंगे, मीडिया चटखारे लेकर खबरें परोसेगा।
जगदीश कुमार खन्ना, विकासपुरी, नई दिल्ली

कहां-कहां माफी दोगे
दिल्ली नगर निगम की ओर से लाई जने वाली आम माफी योजना के तहत जुर्माने और ब्याज से मुक्ति का लाभ उठा कर संपत्ति कर 31 अक्टूबर तक जमा करा सकते हैं। ‘आम काफी योजना’ हो या ‘खास माफी योजना’ चालीस प्रतिशत दिल्ली वालों की नींद तो अंतिम दिन ही खुलती है। चाहे वह संपत्ति कर हो, रिटर्न भरनी हो या वट जमा कराना हो। यही सुनने को मिलता है कि ‘यार! अभी तो काफी दिन हैं’ और जब पानी सिर तक पहुंच जता है तो भाग-दौड़ शुरू हो जती है। बिचौलिए, जनकार ढूंढे जते हैं। काउंटर क्लर्को पर कटाक्ष फेंके जते हैं। यदि लोग शुरुआती दौर में अपने कर्तव्य निभा ले तो शिविरों पर, अतिरिक्त काउंटरों पर, अतिरिक्त स्टाफ पर व्यय होने वाले खर्चे से बचा ज सकता है।
राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

मिलीभगत से अवध मयखाना
दिल्ली में जब भी अवध शराब की बिक्री से आम जनता मरती है, तब सरकार और दिल्ली पुलिस जगती है। हफ्ते दस दिन तक हाय-तौबा मचाकर इलाके की पुलिस अवध शराब बेचने वालों से फिर अपना धंधा चालू करने को कहती है। अगर वे अपना धंधा बंद कर देंगे तो महीने में जो लाखों आ रहा है, कहां से आएगा। मगर पुलिस मुख्यालय में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों को इससे क्या लेना-देना। दिल्ली सरकार का आबकारी विभाग चाहे तो अवध शराब की बिक्री बंद हो सकती है। दक्षिण पश्चिम जिला अंतर्गत आने वाली लोहा मंडी नारायणा एशिया की सबसे बड़ी लोहे की मंडी है, जिसमें हजरों की संख्या में मजदूर रहते हैं मगर स्थानीय थाने की मेहरबानी से यह मंडी शराब मंडी में तब्दील होती ज रही है।
भूषण त्यागी, नारायणा, दिल्ली

दबंगों का गढ़ लोनी
दिल्ली से सटे लोनी इलाके की स्थिति विकासात्मक रूप से तो बदहाल है, पर  क्षेत्रीय लोगों की दबंगई के चलते यह क्षेत्र गाजियाबाद के मानचित्र पर एक अमिट छाप जरूर छोड़ रहा है। लोनी के कई दबंग लोगों ने लोनी-सहारनपुरा मार्ग में अवध रूप से वसूली की जो ठेकेदारी आरंभ कर दी है वह अपने आप में पुलिस की मौजूदगी पर प्रश्नचिह्न् लगा रही है। यदि किसी चालक ने रुपए देने में जरा भी आना-कानी की तो उसकी बेरहमी से पिटाई तो निश्चित है ही, साथ ही उसका वाहन भी तहस-नहस होना है।
अनूप आकाश वर्मा, नई दिल्ली

डीडीए और एमसीडी
डीडीए और एमसीडी दो सगी बहनें हैं जो भ्रष्टाचार और फूहड़पन में शायद एक दूसरे से टक्कर लेती हैं। इसलिए लोग काफी समय से कापरेरेशन को कर-परेशान और दिल्ली विकास प्राधिकार को दिल्ली विनाश प्राधिकरण कहते हैं।
वेद, मामूरपुर, नरेला, दिल्ली

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