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मकान, बिजली-पानी फ्री, फिर क्यों छोड़े कब्जा!

देश के महंगे शहरों में शुमार नोएडा में यदि किसी को मकान, बिजली व पानी फ्री में मिल रहा हो तो वह यहां से जाने का नाम क्यों लेगा? यह काम यदि पुलिस अधिकारी कर रहे हों तो किसकी मजाल कि उन्हें बेदखल कर दे। नोएडा में तैनात रह चुके कई दरोगा अब इसी काम में लगे हैं। बार-बार नोटिस जारी होने के बाद भी वह कब्जा किये सरकारी मकानों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। जबकि बाहर से आये दर्जनों दरोगाओं को एक कमरे का छत भी नसीब नहीं हो रहा है। लोग बाहर महंगे किराये के मकान में रहने को मजबूर हैं।


ज्ञात हो कि नोएडा में तैनात रह चुके इंस्पेक्टर विवेक रंजन राय, दरोगा शहजादुल हक, हरीश कुमार, लेखराज शर्मा, मुकेश कुमार सिपाही कुलविंदर सिंह कोतवाली सेक्टर 24 में बने पुलिसकर्मियों के आवासों पर कब्जा जमा रखा है। जबकि उक्त लोगों का वर्षो पहले गैरजनपदों में तबादला हो चुका है। पुलिसकर्मियों ने जिन आवासों में कब्जा जमाया हुआ है उसमें तीन कमरे, लैट्रिन, बाथरूम, स्टोररूम समेत लान भी है। वेतन से कटने वाली मामूली धनराशि में जब थ्री बीएचके मकान व बिजली-पानी मिल रहा है तो वह क्यों छोड़ें।


क्या है व्यवस्था- जानकारी के अनुसार आवास मिलने की दशा में एक दरोगा को हाउसरेंट के लिए वेतन से करीब 950 रुपए ही कटता है। इसी में बिजली और पानी भी शामिल है। नोएडा जैसे शहर में मामूली पैसे में तीन कमरा मिलने पर कौन मकान खाली करना चाहेगा। बाहर के सेक्टरों में थ्री बीएचके मकान का रेंट करीब 12 से 15 हजार रुपए देना पड़ता है। यही कारण है कि एक बार कब्जा जमाने के बाद कोई भी पुलिसकर्मी मकान खाली करने को तैयार नहीं होता।

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