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नई योजनाओं की लांचिंग में बिहार मॉडल को खासी तरजीह

आम बजट में भले ही बिहार की उम्मीदों पर पानी फिर गया हो लेकिन केन्द्र ने नई योजनाओं की लांचिंग में बिहार मॉडल को खासी तरजीह दी है। मामला चाहे महिला साक्षरता का हो या महिला सशक्तीकरण का अथवा बीपीएल को 25 किलो अनाज देने का। बिहार में इस तरह की योजनाओं पर पहले से ही काम हो रहा है। वैसे बीपीएल को 25 किलो अनाज देने के निर्णय से बिहार सरकार के माथे पर अभी से पसीना छलक आया है। 
   

सरकार ने महिलाओं की साक्षरता के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए साक्षरता मिशन शुरू करने की घोषणा करते हुए अगले तीन वर्ष में कुल निरक्षर महिलाओं के 50 प्रतिशत को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा है। बिहार सरकार ने पहले से ही अक्षर आंचल योजना तैयार कर ली है। राज्य में 9 अगस्त से शुरू होने वाली इस योजना के तहत छह माह के भीतर 15 वर्ष से 35 वर्ष के बीच की 40 लाख महिलाओं को साक्षर बनाया जायेगा। आम बजट में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने और इसका 50 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय भी कहीं ना कहीं बिहार सरकार द्वारा पंचायतों और शिक्षक नियोजन में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने से ही प्रभावित लगता है।

बिहार ने राज्य के गरीबों को 25 किलोग्राम अनाज देने का निर्णय पिछले वर्ष ही किया जो मजबूरी में उठाया गया कदम था। अब केन्द्र भी इसी व्यवस्था को अपनाने की तैयारी कर रहा है। बजट में घोषणा के बाद अधिकाधिक गरीबों को सरकारी अनाज देने के बिहार सरकार के मंसूबे पर पानी फिर गया है। बिहार में बीपीएल परिवारों की संख्या 1 करोड़ 21 लाख है। फिर भी केन्द्र मात्र 65 लाख बीपीएल परिवारों के लिए 35 किलोग्राम प्रति परिवार के हिसाब से अनाज देता है। अब परिवारों की संख्या को घटाकर 61 लाख करने की तैयारी चल रही है। ऐसे में 25 किलो अनाज मिलने से राज्य सरकार की मुश्किलें और बढ़ जायेंगी।

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