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22 जुलाई को ऐतिहासिक सूर्यग्रहण का अध्ययन

मौसम विज्ञान विभाग के खगोल विज्ञान केन्द्र (कोलकाता) ने 22 जुलाई की सुबह होने वाले सदी के ऐतिहासिक संपूर्ण सूर्यग्रहण के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए पटना के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च भवन को सर्वाधिक उपयुक्त माना है। 


संस्थान के निदेशक अनिल सुलभ ने सोमवार को बताया कि खगोल विज्ञान केन्द्र के निदेशक एस.सेन ने इस सिलसिले में पत्र भेजकर उन्हें सूचित किया है कि सूर्यग्रहण के दो दिन पूर्व से ही संस्थान की छत से परीक्षण अभ्यास किया जाएगा और इसके लिए वैज्ञानिकों का 15 सदस्य दल 20 जुलाई से पहले यहां पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि इस कार्य में संस्थान भवन की छत से सूर्यग्रहण का मुआयना किया जाएगा, जिसके लिए टेलीस्कोप कई अन्य यंत्र लगाए जाएंगे।


सुलभ ने बताया कि इसमें मौसम विज्ञान विभाग तथा खगोल विज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत कई संस्थानों के 18 वरिष्ठ वैग्यानिक हिस्सा लेंगे। इस सूर्यग्रहण के मुख्य मार्ग में पटना और उसके आसपास के क्षेत्र प्रमुखता से आ रहे हैं इसलिए वैज्ञानिकों की दृष्टि विशेष रुप से यहां लगी हुई है। दुनिया भर के वैज्ञानिक इस दुर्लभ नजारे के एक-एक क्षण को कैमरे में कैद करना चाहते हैं। 


ऐसा माना जा रहा है कि यह सूर्यग्रहण लंबी अवधि तक संपूर्णग्रास के लिए इस सदी का एक मात्र सूर्यग्रहण है। इसके बाद सन 2168 में ऐसा सूर्यग्रहण फिर से दिखाई पड़ेगा।

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