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आर्थिक संकट से बढ़ेगी आय में असमानता

आर्थिक संकट से बढ़ेगी आय में असमानता

नब्बे के दशक के तेज आर्थिक विकास के बावजूद दुनिया के ज्यादातर क्षेत्रों में आय में असमानता बढ़ी है जो मौजूदा आर्थिक में संकट घी का काम करेगी, जिससे स्थिति और बदतर होगी।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अंतरराष्ट्रीय श्रम अध्ययन संस्थान (आईआईएलएस) द्वारा प्रकाशित अध्ययन के अनुसार पिछले साल उभरा और इस साल अगस्त में भयावह तौर पर सामने आया वित्तीय संकट आधुनिक इतिहास में विश्व अर्थव्यवस्था का अब तक का सबसे बड़ा संकट है।

इस अध्ययन में कहा गया है कि 90 के दशक की शुरुआत और 2000 के मध्य में जिन देशों के आंकडे़ उपलब्ध हैं उनमें से करीब दो तिहाई में उच्च आय वाले परिवारों की कुल आय निम्न आय वाले परिवारों के मुकाबले काफी तेजी से बढ़ी है और इसके साथ ही आय में असमानता स्पष्ट हुई। आय में असमानता के अन्य पहलुओं में भी इसी तरह का रूझान दिखता है जिसमें आय बनाम लाभ या अधिकतम वेतन बनाम निम्न भुगतान वाले श्रमिकों का वेतन शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार जिन 73 देशों के आंकड़े उपलब्ध थे उनमें 51 देशों में पिछले दो दशकों में कुल आय में वेतन का हिस्सा लगातार कम हुआ है। इसी अवधि के दौरान 70 प्रतिशत देशों में ऐसे कर्मचारियों की संख्या दस प्रतिशत बढ़ी जिनके उच्च और निम्न वेतनमान में भारी असमानता थी।

रिपोर्ट में यह भी दर्शाया गया है कि मौजूदा संकट से पहले भी इस बात के संकेत मिल रहे थे कि आय में असमानता शायद ही काबू में हो पाये। वेतन में असमानता के कारण श्रमिक और उनके परिवार अपनी आवासीय निवेश योजनाओं को वित्त पोषित करने और कई बार उपभोक्ता खरीद की योजनाओं से भारी कर्ज में दब रहे थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्वीकरण आय असमानता का प्रमुख वाहक है जो अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह की अनियमितता से उत्पन्न होता है।

इसके अनुसार वैश्वीकरण उत्पादकता और रोजगार वृद्धि में बढ़ोतरी में योगदान करने में नाकाम रहा है लेकिन इसने आर्थिक अस्थिरता को गहरा किया है। इसमें कहा गया कि नब्बे के दशक में व्यवस्थित बैंकिंग संकट के मामले सत्तर के दशक के मुकाबले दस गुना ज्यादा देखने को मिले जिसकी कीमत निम्न आय वाले समूहों को चुकानी पड़ रही है।

रिपोर्ट में उदाहरण दिया गया है कि अमेरिका में 2003 से 2007 के बीच कार्यकारी प्रबंधकों के वेतन 45 प्रतिशत तक बढ़ गए। दूसरी ओर औसत अधिकारी के वेतन में 15 और औसत अमेरिकी श्रमिक के वेतन में मात्र तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई।

अध्ययन में बताया गया है कि 2007 तक अमेरिका की सबसे बड़ी कंपनियों के औसत कार्यकारी प्रबंधक का वेतन औसत कर्मचारी से पांच सौ गुना से भी ज्यादा हो चुका था जबकि वर्ष 2003 में यह अंतर तीन सौ गुना तक ही था। इसमें कहा गया है कि ऐसा ही आस्ट्रेलिया, जर्मनी, हांगकांग, नीदरलैंड और दक्षिण अफ्रीका में भी देखा गया।  इस रिपोर्ट के अंश आईएलओ ने अपनी पत्रिका में प्रकाशित किए हैं।

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  • Web Title:आर्थिक संकट से बढ़ेगी आय में असमानता