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जजों के खिलाफ सबूत नहीं:सीबीआई

गाजियाबाद के पीएफ घोटाले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कथित रूप से आरोपित ज्यादातर जजों के खिलाफ उसे कोई सबूत नहीं मिला है। जांच एजेंसी ने कहा कि वह इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर करना चाहती है। सात करोड़ रुपये के इस घोटाले में निचली अदालतों के 12 जज, इलाहाबाद हाईकोर्ट सात कार्यरत जज तथा छह रिटायर जजों समेत सुप्रीम कोर्ट के एक जज का नाम सामने आया था। घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने शुक्रवार को यह बात एक और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करते हुए दी। जस्टिस अरिाित पसायत की खंडपीठ ने सीबीआई से कहा कि वह अगली स्थिति रिपोर्ट दायर कर जिसमें ऐसे लोगों को उल्लेख कर, जिनके खिलाफ सबूत नहीं मिले। एजेंसी की ओर से सालिसिटर जनरल जी.ई. वाहनवती ने कोर्ट से आग्रह किया कि किसी सीए को निर्देश दिया जाए कि वह इस मामले के मुख्य आरोपी आशुतोष अस्थाना की संपत्तियों को मूल्यांकन कर। साथ ही यह केस दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया जाए। खंडपीठ ने इस बार में कोई निर्देश नहीं दिया। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अधिवक्ता जी.वी. राव कोर्ट में मौजूद थे। गत वर्ष हुए इस घोटाले में केंद्रीय नाजिर के पद पर काम करने वाले अस्थाना ने फर्ाी अर्जियों और हस्ताक्षरों के जरिये गाजियाबाद ट्रेारी से चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की भविष्यनिधि से सात करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि की निकासी की। बाद में उसने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान में कहा कि यह राशि उसने जजों को सुविधाएं (दैनिक उपभोग की वस्तुएं जसे टीवी, फ्रिा, लैपटॉप, तौलिए चादर, फर्नीचर, मोबाइल फोन तथा यात्रा खर्च आदि) मुहैया कराने के लिए निकाली थी। बयान में उसने 34 जजों को नाम लिया था। इस मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी।

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