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दर्जर्नों विभागों को अफसरों की तलाश

जनपद में कई कल्याणकारी योजनाएं लागू हैं। लेकिन इन योजनाओं को चलाने के लिए अधिकारियों का पद स्वीकृत ही नहीं है। जिला स्तर का एक अधिकारी कई-कई विभागों का भार ढो रहा है।

खाली पड़े विभागों में अधिकारियों की नियुक्ति के लिए सैकड़ों बार शिकायतें हुई, लेकिन उच्चधिकारियों ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

उदाहरण के लिए विकलांगों के कल्याण के लिए वर्ष 2007 में विकलांग कल्याण विभाग का गठन किया गया। इस विभाग में करीब 2000 से भी अधिक विकलांग लाभार्थी नामजद हैं। लेकिन, विडंबना यह है कि विभाग के गठन से अब तक यहां विकलांग कल्याण अधिकारी की नियुक्ति ही नहीं हुई है।

विभाग के संचालन का भार अर्थ व सांख्यकी अधिकारी अशोक कुमार के जिम्मे है। इसी तरह अल्पसंख्यकों के विकास के लिए बना अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को पिछले एक वर्ष से अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का इंतजार है। इस विभाग को बने दो वर्ष से ज्यादा हो चुका है।

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