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हम ऐसे नहीं हैं मैडम जी

बीजेपी कार्यकारिणी की बैठक में मेनका गांधी का कहना था कि मुस्लिम बीजेपी को वोट नहीं देते। कहा जाता रहा है कि देने वाले व्यक्तियों की संख्या सीमित रही है, जबकि लेने वालों की संख्या अधिक होती है। अल्पसंख्यकों को भी लगे कि भारतीय जनता पार्टी उनके लिए भी त्याग, सुरक्षा की भावना रखती है। भारतीय लोकतंत्र में लोकल प्रतिनिधि, प्रत्याशी का चुनाव अहम स्थान होता है। जनता उसका विशेष तौर पर ख्याल रखती है। पार्टी के अन्य नेताओं को देखकर नहीं। समाज के बहुत से वर्गो की आत्मा भूखी अतृप्त है। ज्यादातर चुनावी पार्टी महात्मा गांधी के जंतर का अनुसरण नहीं करते। बीजेपी प्रतिनिधियों को भी मुस्लिमों ने वोट दिया है, उसके प्रत्याशी जीत कर संसद में भी पहुंचे हैं। बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी और बीजेपी इसका उदाहरण हैं। मेनका मैडम से सवाल है, मैडम ने भारतीय समाज में साम्प्रदायिकता तथा अपनी ही पार्टी में असंतोष फैलाने की यह अनोखी विधि कहां से सीख ली है।
सैयद परवेज, नई दिल्ली

अतुल्य भारत कितना अतुल्य?
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा हाल ही में एक विज्ञापन ‘अतुल्य भारत’ में फिल्म अभिनेता आमिर खान द्वारा ‘अतिथि देवो भव’ का अर्थ लोगों को समझना, खासकर विदेशी महिलाओं के साथ, हमारी भारतीय परंपरा किस तरह का बर्ताव करने की प्रेरणा देती है, वाकई में एक सराहनीय कदम रहा। किंतु इन सबके बावजूद आए दिन बड़े-बड़े शहरों में विदेशी महिलाओं के साथ दुराचार की खबरें सुनाई पड़ती हैं। ऐसे में सरकार को कड़ा व दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए कि आगे से कोई व्यक्ति हमारे देश की पुरातन सभ्यता व संस्कृति के साथ खिलवाड़ न कर सके। शायद तभी जा कर ऐसी ओछी व अमर्यादित घटनाओं पर लगाम लगाई जा सकती है।
रवि गुप्ता, सेक्टर-6, नोएडा

विपक्ष में घमासान कब तक?
लोकसभा चुनावों में भाजपा को आशा के अनुसार परिणाम न आने के बाद पार्टी में एक दूसरे पर आरोप लगाने व पद छोड़ने के दबाव की राजनीति के चलते पार्टी में घमासान मचा है। सबसे बड़ा विपक्षी दल आपस में लड़ता रहेगा तो सत्ता पक्ष को अनेक मुद्दों पर विपक्ष के विरोध से बचने मेंभी आसानी होगी। भाजपा का सत्ता में न आना केवल इनकी आपसी गुटबाजी का परिणाम रहा है। जब तक भाजपा में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरह पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्णय लेने में सक्षम नहीं होगा तब तक इस प्रकार के झगड़े चलतेरहेंगे। झगड़ों के चलते जनता भाजपा को स्वीकार करने वाली भी नहीं है।
दिनेश गुप्ता, पिलखुवा, उ.प्र.

मंत्रीजी सुधार चाहिए वरना..
ऊज्र मंत्री रामवीर उपाध्याय के विचार बिजली चोरी पर होगी एफआईआर पढ़ा बड़ा अच्छा लगा। किन्तु बिजली विभाग का अपने उपभोक्ताओं के प्रति रवया बिल्कुल फ्रैंडली नहीं है। कनेक्शन लेने से बिल जमा कराने तक नौकरशाही हावी रहती है। बिजली के बिल जमा कराने के लिए लम्बी-लम्बी लाइनें ऊपर से शेड नहीं, पीने का पानी नहीं और यदि बिल जमा न हो तो कनेक्शन काटने की धमकी और काट भी देते हैं। कैसी विडम्बना है? कैसा नियम, कि देहात क्षेत्र गांव वाले को कनेक्शन कटवाने के लिए नाकों चने चबाने पड़ते हैं। और यहां गाजियाबाद में प्लास लिए घूमते रहते हैं। एक और बात सुनवाई  कहीं नहीं इस विभाग में कोई आपका प्रार्थना-पत्र रिसीव नहीं करता। ऐसी व्यवस्था नहीं है कि आप अपनी समस्या लिखकर उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दें। माननीय मंत्री समय रहते यदि सुधार न हुआ तो जनता अपना फैसला उचित समय पर सुना देगी।
कृष्ण कुमार वर्मा, गाजियाबाद

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