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85 प्रतिशत आदिवासी महिलाओं में खून की कमी

झारखंड में 70 फीसदी से अधिक महिलाओं में खून की कमी पायी गयी है। अशिक्षित महिलाओं में यह औसत 74 फीसदी और आदिवासियों में 85 फीसदी है। छह से 5महीने के 70 फीसदी बच्चों में भी खून की कमी के लक्ष्ण पाये गये हैं। वयस्क पुरुषों में यह दर 37 प्रतिशत है। इसका प्रमुख कारण भोजन में पर्याप्त मात्रा में लौह तत्व का नहीं होना है। यह जानकारी पोषण सुरक्षा के लिए प्रतिबद्धता निर्माण विषयक कार्यशाला में प्रस्तुत रिपोर्ट में दी गयी।ड्ढr स्वयंसेवी संस्था केयर की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि झारखंड के 57 प्रतिशत बच्चों का वजन उम्र के अनुपात में कम है। 47 फीसदी बच्चों की लंबाई उम्र के अनुपात में और 36 फीसदी का वजन लंबाई के अनुसार कम है। ये कुपोषण के लक्षण हैं। पांच वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण की दर अत्याधिक है। सबसे अधिक कुपोषण छह महीने से तीन वर्ष उम्र तक के बच्चों में पाया गया।ड्ढr मुख्य अतिथि उप विकास आयुक्त एस किड़ो ने कहा कि यह स्थिति खतर का संकेत है। समस्या के निराकरण के लिए लोगों को सरकार से मिलकर काम करना होगा। सिविल सर्जन डॉ गीता कंठ ने बताया कि एक मार्च से जननी सुरक्षा योजना के तहत अस्पताल में प्रसव की स्थिति में 14 सौ रुपये का चेक दिया जाता है। साथ आने वाली सहिया को डेढ़ से ढाई सौ रुपया दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट कमिश्नर के राज्य सलाहकार बलराम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की जानकारी दी। एक्सआइएसएस सभाकक्ष में आयोजित कार्यशाला में केयर के राज्य निदेशक सुजीत रांन, रविकांत उपाध्याय और कई ग्राम प्रधान और एनजीओ प्रतिनिधि उपस्थित थे।प्राथमिक शिक्षा में फिसड्डी साबित हो रहा झारखंडरांची। प्राथमिक शिक्षा (ग्रामीण क्षेत्र) के मामले में झारखंड पड़ोसी राज्य बिहार और आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ से पीछे है। प्रथम, झारखंड के एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (औपबंधिक) में झारखंड और अन्य राज्यों के आंकड़ों की तुलना कर यहां के शैक्षणिक पिछड़ेपन को बखूबी रखांकित किया गया है।ड्ढr इसमें बताया गया है कि राज्य के तीन से पांच वर्ष तक के 70.10 फीसदी बच्चे ही आंगनबाड़ी या अन्य स्कूल जाते हैं। वहीं राष्ट्रीय औसत 76.40 है। छह से 14 वर्ष तक के बच्चों में नामांकन का प्रतिशत 0 है, वहीं राष्ट्रीय औसत 0 है। राज्य में छह से 14 वर्ष तक के 5.40 फीसदी बच्चे ड्रॉपआउट हैं, जो राष्ट्रीय औसत (4.30) से अधिक है।ड्ढr इसी तरह (कक्षा एक और दो) के अक्षर, शब्द या उससे अधिक पढ़ने वाले बच्चे मात्र 67.60 फीसदी हैं (राष्ट्रीय औसत-75.40)। कक्षा एक और दो के बच्चे, जो संख्या एक से नौ और अधिक को पहचानते हैं का प्रतिशत 66.80 है, वहीं राष्ट्रीय औसत 75.70 फीसदी है। झारखंड में कक्षा तीन से पांच तक के 62.20 फीसदी बच्चे ही कक्षा एक के अनुच्छेद या उससे अधिक पढ़ सकते हैं। इसका राष्ट्रीय औसत 66.60 है। कक्षा तीन से पांच के घटाव (ऋण) व भाग के सवाल हल करने वाले बच्चे झारखंड में मात्र 50.30 फीसदी हैं, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 54.0 फीसदी है।ड्ढr यह र्पिोट शुक्रवार को एसडीसी सभागार में जारी की गयी। मौके पर मुख्य अतिथि दीपक तिर्की, प्रो हरीश्वर दयाल, आद्री के निदेशक पीएन सिंह, संजय कुमार, निशांत राय, कुमार कात्यायनी और अन्य मौजूद थे।

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