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30 मार्च, 2020|2:52|IST

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रामनरेश को उग्रवादी बताये जाने को लेकर विधान सभा में हंगामा

महोदय, ये बताएं कि 89 वर्ष के बूढ़े और पिछले 15 वर्षो से विधानसभा के सदस्य रामनरेश राम उग्रवादी कैसे हो गए? भाकपा माले के विधायक अरुण कुमार ने शून्य काल में हिन्दुस्तान में छपी खबर पर यह मामला उठाया और हंगामा शुरू हो गया।

श्री कुमार का कहना था कि आरा के इंस्पेक्टर ने माले विधायक दल के नेता रामनरेश राम और पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद को उग्रवादी घोषित कर दिया है। उनके इतना कहते ही पूरा विपक्ष खड़ा हो गया और ऐसा करने वाले इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करने लगा।

विधायकों के आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खड़े होकर कहा कि राज्य सरकार इस मामले को  गंभीरता से देखेगी। माले विधायक ने सदन में हिन्दुस्तान में छपी खबर की कटिंग भी मुख्यमंत्री को सौंपी। माले विधायकों का तो कहना था कि यह विधानसभा की मर्यादा का हनन है इसलिए संबंधित इंस्पेक्टर को बर्खास्त किया जाना चाहिए।

माले के साथ-साथ अन्य वामपंथी दलों के विधायकों ने रामनरेश राम को विधान सभा के अध्यक्ष के आगे खड़ा कर दिया। सदस्य बार-बार वृद्ध श्री राम की ओर इशारा करके कह रहे थे कि आखिर वे किस कोण से उग्रवादी दिखाई पड़ते हैं।

अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी का कहना था कि उन्होंने इस मामले को अपने संज्ञान में ले लिया है इसलिए सदस्य शांति से अपनी जगह पर बैठ जाएं। कई विपक्षी सदस्य इस मामले की जांच सदन की कमेटी से कराने की मांग कर रहे थे।

मामले को बिगड़ता देखकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद अपनी जगह पर खड़े हुए और उन्होंने कहा कि विधायक उग्रवादी कैसे हो सकते हैं? सरकार इस मामले को गंभीरता से देखेगी और जो भी इस मामले का सच है उससे सदस्यों को अवगत करा दिया जाएगा।

शून्य काल में ही सत्यनारायण सिंह ने विधायक कोटे से लगाये जा रहे चापाकलों का मामला उठाया और इस पर कई विधायकों कहना था कि जमीन पर इस मामले में काम नहीं हो रहा है। प्रदीप कुमार, लालबाबू राय और डा. इजहार अहमद ने भी इस दौरान कई मामले उठाये।

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  • Web Title:89 साल के विधायक उग्रवादी कैसे हो गए?