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असंतुष्टों को मनाने की कोशिश

टिकट नहीं मिलने से नाराज नेताओं को भाजपा नेतृत्व चुनाव प्रबंधन और अभियान समिति में बड़ी जिम्मेदारी देकर खुश करने में लगा है। पिछले साल अप्रैल में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विरोध की आंधी में न सिर्फ नेतृत्व खेमा बल्कि जख्मी जमात ने भी रणनीति के तहत ‘साथी’ विधायकों-नेताओं से कई वायदे किए थे। इनमें एक लोकसभा टिकट का लॉलीपॉप भी था।ड्ढr ड्ढr पिछले दिनों कोर कमेटी की पटना और दिल्ली में हुई बैठकों में भी दोनों खेमे ने संघर्ष के साथियों को टिकट दिलाने के लिए पैरवी करते रहे। उनके भरोसे के सहार कई नेता दिल्ली में डेरा डाले रहे। मगर केन्द्रीय चुनाव समिति ने अंतत: जब एनडीए के तहत पार्टी कोटे की सभी 15 सीटों के लिए उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की तो पता चला कि जख्मी जमात समर्थक एक भी नेता को टिकट नहीं मिला जबकि नेतृत्व खेमा संकट में साथ देने वाले तीन-चार विधायकों को टिकट दिलाने में कामयाब रहा। इसे लेकर इस जमात में नेतृत्व के खिलाफ काफी असंतोष है। कहीं इसका असर चुनाव नतीजों पर न पड़े इसके लिए नेतृत्व समर्थक कुछ बड़े नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। इसके तहत चुनाव प्रबंधन समिति का प्रभार पूर्व मंत्री जनार्दन सिंह सीग्रीवाल को दिया गया है। सीग्रीवाल छपरा से पार्टी टिकट के दावेदार थे। जो चुनाव लड़ नहीं सके वैसे नेताओं को सीपी ठाकुर की अगुआई में चुनाव अभियान समिति का संयोजक बनाकर एडजस्ट किया गया है। इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह, पूर्व मंत्री चन्द्रमोहन राय, संजय पासवान, गया से पिछली बार पार्टी प्रत्याशी रहे बलबीर चांद, गया से ही प्रत्याशी की रस में रहे कृष्ण कुमार चौधरी, डा. अजय कुमार (नवादा से पार्टी टिकट के दावेदार), विधायक रामेश्वर प्रसाद चौरसिया, अमरन्द्र प्रताप सिंह और जनार्दन यादव, विधान पार्षद ताराकांत झा, बालेश्वर सिंह भारती व रामकिशोर सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष विजय कुमार मिश्र व सुखदा पांडेय हैं। इन सभी को चुनाव लड़वाने की जिम्मेदारी दी गई है। टिकट मिलने के बाद शत्रुघ्न सिन्हा जब पहली बार पटना आए तो मंच पर उनके साथ प्रमुख नेताओं को देखकर सबका यही कहना था कि जख्मी जमात अब नई भूमिका में आ गई है।

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