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30 मार्च, 2020|3:35|IST

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खाद्यान्न व पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के आसार

खाद्यान्न व पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के आसार

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की आम बजट और चालू वित्त वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था को संभालने की चुनौतियां और कठिन हो गई हैं। यह सब बजट तैयारियों के बीच हुआ है, इसलिए वित्त मंत्री के बहीखाते में उलटफेर से इनकार नहीं किया जा सकता है। ये मामले औसत से कम मानसून और पेट्रो उत्पादों के मूल्य बढ़ने के दबाव से जुड़े हैं। इसका परिणाम खाद्यान्न और पेट्रो सब्सिडी बढ़ोत्तरी के रूप में आएगा।

अहम बात यह है कि इन मुद्दों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं हैं। इसलिए आगे का रास्ता इन्हीं परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था को संभालने की चुनौती का सामना होगा। सरकार आगामी बजट में राजकोषीय घाटे की परवाह किये बगैर सरकारी खर्च बढ़ाते हुये घरेलू मांग बढ़ाने की रणनीति पर कायम हैं और साथ ही मध्यावधि में राजकोषीय हालत को दुरुस्त करने का रोडमैप भी बजट में घोषित करने जा रही है।लेकिन नये हालातों में वास्तविक घाटा वित्त मंत्री के राजकोषीय घाटे के अनुमान यानी जीडीपी के 5.5 फीसदी से ज्यादा निकलने की पूरी आशंका बनी है।

मानूसन में कमी एक अरब से ज्यादा आबादी के लिए कई महत्वपूर्ण जिंसों की कमी पैदा करेगी। नतीज होगा मूल्य बढ़ोत्तरी और अनुपलब्धता। सरकार को सस्ता आयात करना होगा, निर्यात प्रतिबंधों के साथ। मतलब किसानों की आय गिरेगी। सरकार का राजस्व कम होगा। 60 फीसदी से ज्यादा का हिस्सा रखने वाली ग्रामीण अर्थव्यवस्था के चरमराने का असर उद्योग प्रॉफिट माजिर्न में कमी के रूप में ङोलेगा जिससे सरकार को और घाटा होगा।

दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजर में क्रूड ऑयल के दाम फिर से 70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गये हैं। अनुमान है कि ये निकट भविष्य में 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचेंगे। मतलब सरकार के पेट्रो सब्सिडी बिल में बीते साल की तरह फिर से बढ़ोत्तरी होगी। बीते साल यह 1.06 लाख करोड़ रुपये थी। सरकार पिछले काफी दिनों से सब्सिडी बिल में कमी की कवायद में जुटी हैं। तेल कंपनियां मूल्य बढ़ाने का दबाव सरकार पर डाल रही हैं।

पंरपरागत रूप से सरकार ने घाटे को तीन हिस्सों में बांटा तो खुद राजस्व में कमी और सब्सिडी बोझ बढ़ाने के साथ एक हिस्से को बोझ उपभोक्ताओं पर डालेगी। इसका दुष्प्रभाव अर्थव्यवस्था पर उल्टा होना तय है। कॉरपोरेट गतिविधि और रोजमर्रा की जिंदगी महंगी होने का मतलब घरेल मांग में कमी और प्राफिट माजिर्न घटने से होगा।

जाने-माने अर्थविद पाई पनंदीकर के अनुसार नई परिस्थितियों में सरकार का सब्सिडी बिल बढ़ेगा, खासतौर पर खाद्यान्न सब्सिडी बिल। वजह सामान्य फार्मूले के मुताबिक 10 फीसदी बारिश में कमी कृषि उत्पादन का पांच फीसदी घटाएगी जिससे 30 हजर करोड़ रुपये का घाटा होगा। पेय जल समस्या पैदा होगी और बिजली उत्पादन गिर जाएगा।

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