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24 फरवरी, 2020|11:37|IST

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class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कंपनी एफडी

पहली नजर में देखने पर कंपनी एफडी में निवेश ज्यादा ब्याज दर देने वाले लगता है, लेकिन इन डिपॉजिट्स में रिस्क फैक्टर की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि पूरी प्रक्रिया को समझने के बाद ही निवेश किया जाए।

- कंपनी के फिक्सड डिपॉजिट कंपनी द्वारा स्पेसिफक समय के लिए ऑफर किए जाते हैं। सामान्यत: भारतीय बाजार में यह एक, दो या तीन वर्ष के लिए दिए जाते हैं। 

- कंपनी के पास फंड एकत्र करने के विभिन्न तरीके होते हैं। विज्ञापनों के द्वारा, निवेशकों से यह कहकर कि वह डिपॉजिट के लिए आवेदन करें। 

- कुछ लोग कंपनी धारकों से डिपॉजिट को दुबारा चालू रखने का अनुरोध करते हैं, वहीं कुछ डिपॉजिट एकत्र करने के लिए ब्रोकर के नेटवर्क का सहारा लेते हैं। 

- कंपनी के फिक्सड डिपॉजिट का महत्वपूर्ण पहलू यह होता है कि ऑफर किए जाने वाला रिटर्न में जोखिम, किसी दूसरे इंस्ट्रमेंट की तरह होता है। 

- जब डिपॉजिट करने पर ज्यादा दर पर ऑफर किए जाने की बात कही जाए, तो इस बात की जानकारी जरूर कर लें कि यह इतनी दर पर क्यों दिया जा रहा है। ऐसे में कंपनी का प्रदर्शन अगर बेहतर न रहा, तो रिस्क की संभावना बढ़ जाती है। 

- कंपनी निवेश की न्यूनतम दर का निर्धारण कर देती है, यह न्यूनतम दर कई मामलों में एक लाख तक हो जाती है, जिससे इसमें निवेश करने वालों की संख्या सीमित हो जाती है। वहीं कुछ लोग निवेश की दर दस हजार से शुरू करते हैं, जिससे बड़े वर्ग को इसका फायदा मिलता है।