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आतंकियों से जबरिया निकाह से नरक बना जीवन

ाम्मू-कश्मीर में बंदूक की नोक पर आतंकवादियों से शादी के लिए मजबूर की गइर्ं कुछ लड़कियों का जीवन नरक बन गया है। किश्तवाड़ जिले के पहाड़ी गांव छतरो की 16 वर्षीय फातिमा बी ने टेलीफोन पर बताया कि वह केवल 12 वर्ष की थी जब उसका अपहरण कर जबरन निकाह कर दिया गया। फातिमा बी बताती है कि जब वह एक सरकारी स्कूल की कक्षा सात में पढ़ती थी तब हरकत-उल-जेहाद-ए-इस्लामी (हुजी) के डिविजनल कमांडर शेरखान के नेतृत्व में चार आतंकवादियों ने उसका अपहरण कर लिया था। उसने बताया कि उन्होंने पास के जंगल में अपने छुपने के ठिकाने पर ले जाकर उसे आठ दिनों तक प्रताड़ित किया। उन्होंने हाशिम दित्ता से शादी नहीं करने पर उसके पूरे परिवार का सफाया करने की धमकी दी। फातिमा की इच्छा पढ़ाई पूरी करके एक स्कूल में अध्यापिका बनने की थी लेकिन उसके सपने बिखर गए। विवाह के 10 महीने बाद उसने एक पुत्र को जन्म दिया। शेरखान और उसके दो सहयोगियों के पिछले वर्ष सुरक्षा बलों के सामने समर्पण करने और आठ वर्ष के कारावास की सजा मिलने के बाद फातिमा ने इस अवसर का लाभ उठाया और अपने नवजात शिशु के साथ दित्ता के घर से भाग निकली। वह नजदीक के एक गांव में अपने रिश्तेदारों के यहां पहुंची और एक किसान से निकाह कर लिया। यह बहुत आसान नहीं रहा और स्थानीय मौलवी ने जबरन निकाह के बावजूद औपचारिक तलाक तक उसे दित्ता के साथ रहने को कहा था। ऐसा ही वाकया 18 वर्षीय चना के साथ हुआ जिसके दु:स्वप्न वर्ष 2007 से शुरू हुए। हरकत-उल-अंसार के एक आतंकवादी फरीद ने उसे जानवर चराते देखा और उस पर फिदा हो गया। उसे भी बंदूक की नोक पर फरीद से निकाह को मजबूर किया गया। कुछ महीने पहले लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी खालिद ने उससे निकाह करना चाहा और फरीद से चना को तलाक देने को कहा। फरीद के इंकार करने पर उसने गोली मारकर फरीद की हत्या कर दी और चना से जबरन निकाह कर लिया। चना अब अपने फरीद से पैदा हुए पुत्र सहित खालिद के साथ रह रही है।

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