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9 जुलाई, 2020|8:31|IST

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रुक गया मजदूरों का पलायन

ऐसा माना जाता है कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) की सफलता के कारण भी ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में काफी वोट मिले ..

पटना जिले में यह योजना दो फरवरी, 2006 को जमीन पर उतरी
अब तक जॉब कार्ड जारी हुए 7,96,364 लोगों के

नरेगा यहां बहुत हद तक अपने मकसद में कामयाब है। इससे मजदूरों को रोजगार मिला है और इस कारण पलायन भी रुका है। पहले खेतिहर और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को रबी और खरीफ फसलों की बुआई-कटाई के बीच खाली समय में रोजगार की तलाश में गांव छोड़ना पड़ता था लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। पटना जिले में तीन साल से ज्यादा के सफर में यह योजना मजदूरों के लिए वरदान साबित हो रही है हालांकि सौ दिन रोजगर उपलब्ध कराने में यह जिला काफी पीछे है। इस योजना के तहत ज्यादातर काम मिट्टी के होते हैं। इसमें आहर, पईन, पोखर की उड़ाही से लेकर बांध की मरम्मत तक के काम शामिल हैं।

मजदूरों की महीने तक काम की खोज में शहर जाना पड़ता है। मोकामा प्रखंड में मजदूरों के पलायन में कमी हुई है। इस प्रखंड के मजदूर उमेश दास, मुकेश कुमार व सनातन मिस्त्री ने बताया कि जब से नरेगा शुरू हुआ है उन्हें काम की खोज में बाहर नहीं जाना पड़ता है। खेती के बाद खाली दिनों में अच्छा खासा काम मिल जाता है। पालीगंज प्रखंड के पीपरदाहां बंगला गांव के पूना बिंद व देव प्रसाद बिंद 1978 से मिट्टी काटने का काम कर रहे हैं। नरेगा के कारण गांव के आसपास ही काम मिल जाता है। बिक्रम प्रखंड के लालजी मांझी, भइया मांझी व किसुन मांझी का कहना है कि काम के लिए अब बाहर नहीं पड़ता है। पहले खेती के बाद पंजाब जाते थे। पिछले दो साल से काम की खोज में बाहर नहीं गये हैं। इनका कहना है कि साल में सौ दिन तो काम नहीं मिलता है लेकिन रोटी के लिए बाहर जाने की जरूरत अब नहीं पड़ती है। मनेर प्रखंड के मजदूरों के पलायन में भी कमी हुई है।

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