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कहीं से ईंट कहीं से रोड़ा जुटा कर खड़ा कांग्रेस ने यूपी में अपना कुनबा

हीं से ईंट कहीं से रोड़ा जुटा कर कांग्रेस ने आखिरकार यूपी में लोकसभा चुनाव के लिए अपना कुनबा खड़ा कर लिया है। सपा, बसपा और भाजपा के बागी उम्मीदवारों को टिकट देकर कांग्रेस ने विरोधी दलों में सेंध लगाने का दाँव खेला है। कांग्रेस ने अपने निष्ठावान कार्यकर्ताओं का टिकट काट कर दो दिन पहले पार्टी में शामिल हुए करीब एक दर्जन दल बदलुओं को टिकट दे दिया। इनमें आधे से ज्यादा उम्मीदवार जातीय समीकरण के कारण सीधी लड़ाई में आ गए हैं। इनमें कई तो सीट भी निकालने की स्थिति में पहुँच गए हैं। ड्ढr एक वक्त था जब यूपी में कांग्रेस के पास उम्मीदवारों का संकट था। सपा से गठबंधन टूटने के बाद कांग्रेस ने केवल चुनिंदा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करने का फैसला किया था। लेकिन दलबदलुओं ने कांग्रेस को सम्मानजनक चेहर दे दिए। देखते-देखते कांग्रेस के 53 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। चौथी लिस्ट अभी आने वाली है। कांग्रेसी नेता उत्साहित हैं और कार्यकर्ता जोश से लबरा हैं।ड्ढr कांग्रेस अन्य दलों से टिकट न मिलने वालों का अंतिम शरणालय बन गया। भदोही में उपचुनाव की हार से नाराज बसपा ने सूर्यमणि त्रिपाठी का टिकट काट दिया था। इसी तरह मिर्जापुर से रमेश दुबे का टिकट काटा। इन दोनों को कांग्रेस ने टिकट दे दिया है। यह दोनों उम्मीदवार अब बसपा की सोशल इांीनियरिंग के लिए खतरा बन सकते हैं। बदले में कांग्रेस को मिर्जापुर में अपने पूर्व प्रत्याशी राजेशपति त्रिपाठी का पत्ता काटना पड़ा। त्रिपाठी को पिछले चुनाव में एक लाख 40 हाार वोट मिले थे। अब बसपा के बागी कांग्रेस के इस खांटी वोट बैंक को भुनाएँगे। इनका निशाना बसपा होगी।ड्ढr बागपत से भाजपा के सोमपाल शास्त्री ने बगावत की। शास्त्री 1े चुनाव में चौ. चरण सिंह के बेटे अजित सिंह को हरा चुके हैं। भाजपा-रालोद के समझौते के चलते यह सीट भाजपा को अजित सिंह के लिए छोड़नी पड़ी थी। शास्त्री मजबूरन कांग्रेस में गए। बागपत में कांग्रेस अजित सिंह पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने में जुटी है। ठीक इसी तरह रमेशचन्द्र तोमर को हापुड़ में भाजपा के टिकट पर करीब दो लाख वोट मिले थे। इस सीट पर कांग्रेस के सुरेन्द्र गोयल जीते थे। परिसीमन में हापुड़ सीट खत्म होकर बंट गई। अब गोयल गाजियाबाद से भाजपा के राजनाथ सिंह के मुकाबले में खड़े हैं। यानी गौतमबुद्ध नगर में तोमर के लिए मैदान खाली है। नोएडा से लेकर खुर्जा तक तोमर को अपने वोट बैंक के अलावा कांग्रेस का समर्थन मिलेगा।ड्ढr इसी तरह बालेश्वर यादव ने पडरौना पिछला चुनाव नेलोपा के टिकट पर जीता था। पड़रौना सीट अब कुशीनगर में तबदील हो गई। यह सीट यादव के लिए मुफीद नहीं थी तो उन्होंने कांग्रेस के आरपीएन सिंह के लिए सीट छोड़ दी। बदले में कांग्रेस ने यादव को पड़ोस की देवरिया सीट से टिकट दे दिया। देवरिया में मोहन सिंह सपा के सांसद हैं। यादव सपा के वोट काटने के लिए तैयार बैठें हैं। जातीय समीकरण भी उनके पक्ष में है।ड्ढr जातीय समीकरणों की लड़ाई में सपा के पुराने बागी बेनी प्रसाद वर्मा भी मैदान में डट गए हैं। गोण्डा में बसपा, भाजपा और सपा के उम्मीदवार ठाकुर हैं। इस सीट पर ब्राह्मण-ठाकुर वोटरों में छत्तीस का आँकड़ा है। कांग्रेस दावा है कि पिछड़ों के साथ अब सारे ब्राह्मण बेनी बाबू के साथ हैं। कांग्रेस के वीरेन्द्र मदान कहते हैं कि ‘यह तो बैठे बिठाए लाटरी लगने जसा है।’ बदायूँ से सपा के सांसद रहे सलीम शेरवानी पिछला चुनाव दो लाख पैसठ हाार वोटों से जीते थे। सपा-बसपा ने इस सीट पर क्रमश: धमेन्द्र यादव और डीपी यादव को टिकट दिया है। मुस्लिम वोटों पर एकछत्र राज का दावा करने वाले शेरवानी इसका फायदा उठाने के लिए तैयार बैठे हैं। इसी तरह धर्मराज पटेल 1े चुनाव में सपा के टिकट पर एक लाख तिरासी हाार वोटों से जीते थे। इस सीट पर पिछला चुनाव सपा के टिकट पर अतीक अहमद जीते। अब अतीक सपा में नहीं हैं और प्रतापगढ़ से लड़ रहे हैं। ऐसे में पटेल फूलपुर में सपा को नुकसान पहुँचाने के लिए काफी हैं।ड्ढr ड्ढr

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