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पीलीभीत में पहले से ही हंगामे की योजना थी

वरुण गांधी के साम्प्रदायिक भाषण मसले को पूरे चुनाव में भुनाने पर उतारू भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों ने पीलीभीत में वह सबकुछ किया जो वह करना चाहते थे। दिलचस्प यह था कि शासन व प्रशासन मंशा भाँपने के बावजूद भगवा बिग्रेड के इन मन्सूबों को पूरा होने से रोक नहीं सका। शुक्रवार को देर रात तक पीलीभीत से लेकर लखनऊ तक के आला अफसर इसी फेर में उलझे रहे कि वरुण को पहले ही गिरफ्तार कर लें या फिर उन्हें आत्समर्पण करने दें।ड्ढr पीलीभीत पुलिस प्रशासन से लेकर शासन तक यह भाँप पाने में विफल रहा कि भाजपा के लोगों ने कितने सुनियोजित ढंग से इस आत्मसमर्पण को एक आंदोलन का रूप दे दिया। गाँव-गाँव से लोग ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर देर रात से ही शहर में पहुँचने शुरू हो गए थे। उपद्रव की स्थिति में भाजपा न फँसे इसके लिए यह लोग भाजपाई झंडों के बजाए भगवा झंडे लेकर आए थे। ऐसा भाजपा के कुछ बड़े नेताओं के निर्देश पर किया गया। भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र खुद मौके पर पहुँच कर सारी गतिविधियों का संचालन कर रहे थे। हालाँकि उनका कहना था कि वह इस बात पर नजर रखने आए हैं कि पार्टी के लोग चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन न करें। अधिकारियों को यह बात पता थी कि वरुण गांधी के मामले को .हाईप्रोफाइल. बनाकर भाजपा इसका फायदा उठा सकती है। इसके बावजूद प्रशासन ने तय किया कि खुद वरुण की गिरफ्तारी न की जाए बल्किजिला प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए एहतियात के तौर पर धारा 144 लागू कर दी थी। इसके बावजूद 25 हजार से ज्यादा लोग श्री गांधी के साथ उनके जिंदाबाद के नारे लगाते हुए चल रहे थे। भाजपा के जिलाध्यक्ष योगेन्द्र गंगवार ने कहा कि पार्टी चाहती थी समर्पण शांति से हो इसीलिए किसी को भी बुलाया नहीं गया था लेकिन श्री वरुण गांधी के समर्थन में हाारों लोग खुद पहुँच गए। देर शाम तक पीलीभीत को लेकर पुलिस के सीनियर अधिकारियों और गृह विभाग ने चुप्पी साध रखी थी। बैठकों का दौर चल रहा था।

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