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महामाया प्रोजक्ट, अभी प्रशासन बांट सका सिर्फ 16 लाख

सरकारी अमला अजीब उलझन में है। अफसरों को गरीबों की नवजात बेटियों की तलाश हो रही है और यह काम हो नहीं पा रहा। दरअसल,महामाया बालिका आर्शीवाद योजना में शासन ने सिर्फ एक साल में बांटने के लिए नौ करोड़ की रकम भेजी है।

अफसर टेंशन में इसलिए हैं, क्योंकि अभी तक इसमें से सिर्फ साढ़े सोलह लाख रुपये ही बांटे जा सके हैं। ग्राम प्रधानों की बेरुखी और लोगों की जगरुकता की कमी की वजह से यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही। बेटी पैदा होने के बाद कोई गरीब उसके भविष्य की चिंता न करे, इसलिए शासन ने महामाया योजना चला रखी है।

इसमें बीपीएल कार्डधारी लोगों के यहां दो बेटियां पैदा होने तक दोनों के नाम बीस-बीस हजार की एफडी देने की व्यवस्था की गई है। शर्त यह रखी गई है कि एक तो लोग सरकारी लाभ के हकदार बनने को परिवार को दो बच्चों तक की सीमित रखें और दूसरा बेटियां अपने मां-बाप पर बोझ न बनें। जब वे शादी योग्य हों, तो सरकारी पैसा दो लाख रुपये उनको मिल सके।

इस योजना का लाभ सिर्फ उन बच्चियों को ही दिया जा रहा है जो 15 जनवरी के बाद पैदा हुई हैं। वैसे, तो रोज में ही सौ से अधिक लड़कियों के पैदा होने का अनुमान है, मगर महामाया योजना के लिए फिर भी बेटियां नहीं मिल रहीं। लोकसभा चुनाव से पहले प्रशासन ने 59 बच्चियों को बीस-बीस हजार की एफडी दी थीं।

चुनाव में योजना रोक देनी पड़ी। चुनाव खत्म हुए भी काफी समय गुजर चुका है मगर अभी तक सिर्फ 33 और बेटियों को ही योजना का लाभ दिया जा सका है। जिला कार्यक्रम अधिकारी संध्या सोनी बताती हैं कि शासन से मिले नौ करोड़ रुपये विभाग को इसी साल बांटने हैं।

ऐसा न हुआ तो बाकी की रकम लौटानी पड़ेगी। लोगों में जगरुकता की कमी की वजह से गरीबों के यहां पैदा होने वाली बेटियों के रजिस्ट्रेशन कम हो रहे हैं। जल्द ही जिले के सभी प्रधानों के साथ वर्कशाप कर लोगों को इस दिशा में प्रेरित करने की कोशिश की जाएगी।

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  • Web Title:अबके बरस बेटियों में बांटो नौ करोड़