DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दो टूक

चोट वहां ऑस्ट्रेलिया में बच्चों के शरीर को लगती है और आत्मा यहां उनके मां-बाप की लहूलुहान होती है। उनकी रातों की नींद उड़ चुकी है। फोन की हर घंटी डरा देती है। लेकिन इस यंत्रणा से, इस तौहीन से, हम सबक क्या ले रहे हैं?

क्या अब भी हमें लगता है कि थोड़ी सी ज्यादा कमाई के लिए जिगर के टुकड़ों को परदेस की अनिश्चितताओं में झोंक देना समझदारी है? इन तथाकथित अमीर मुल्कों की खुदगर्जी हम कब समङोंगे? नस्ली हमले रोकने में लगातार फेल सरकारों का नाकारापन हम क्यों नहीं देख पाते?

इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया या कनाडा में पसरे भेदभाव हमें नींद से जगाते क्यों नहीं? संकीर्णताओं से पटे पड़े इन मुल्कों में जिंदगी बिताना हमें अपने मुल्क में जिंदगी बिताने से बेहतर क्यों लगता है? हम क्यों अपनी नौजवान ऊज्र इन मंदी के मारे, बुढ़ाते मुल्कों को सौंपने को राजी हो जते हैं?

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दो टूक