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देश की प्रबंधन शिक्षा में शोध कार्य काफी कम

भारत में प्रबंधन शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है। 10 के दशक में व्यवसाय के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी एमबीए की शिक्षा शुरू होने के बाद स्थिति में बदलाव हुआ है। दूर शिक्षा के क्षेत्र में एमबीए का प्रवेश होने से इस क्षेत्र में छात्रों का रुझान लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि जिस गति से प्रबंधन शिक्षा का विकास हो रहा है उससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। अभी भी देश में प्रबंधन शिक्षा में शोध कार्य काफी कम हो रहे हैं। इस कारण विशेषज्ञों की कमी प्रबंधन संस्थानों में है। भारत को प्रबंधन शिक्षा में बेहतर मुकाम दिलाने के लिए सभी क्षेत्रों में हमें बेहतर कदम उठाने होंगे।ड्ढr ड्ढr इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट एंड इंफारमेशन टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यानमाला में ‘विश्व में प्रबंधन शिक्षा का वर्तमान ट्रेंड’ विषय पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कोचीन विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पद्मभूषण डा. एमवी पायली ने कहा कि पेंसिलवानिया व हारवर्ड के बाद अमेरिका के दूसर विश्वविद्यालयों में व्यवसाय प्रबंधन की शिक्षा शुरू हुई। उन्होंने प्रबंधन शिक्षा के शुरुआती दौर से आज के दौर तक की चर्चा की।ड्ढr ड्ढr इग्नू के कुलपति प्रो. वीएन राजशेखरन पिल्लै ने कहा कि बेहतर प्रबंधकों का निर्माण करने में खुला विश्वविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्टडी सेंटर पर इस प्रकार के व्याख्यान से छात्रों को काफी लाभ मिलेगा और हम अन्य सेंटरों पर भी इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करायेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र ने कहा कि भारत में व्यवसाय प्रबंधन की शिक्षा के क्षेत्र में यूजीसी व एआईसीटीई के विशेषज्ञ के तौर पर काफी कार्य किया। उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार के तीसर आर्थिक पैकेा से अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ-साथ गति भी मिलेगी। इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डा. रामचंद्र ने कहा कि बेहतर प्रबंधकों के लिए आर्थिक मंदी का कोई असर नहीं होने वाला है। अतिथियों का स्वागत निदेशक प्रो. चक्रधर सिन्हा ने किया।

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