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15 अगस्त, 2020|1:58|IST

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भूजल वैज्ञानिकों के अनुसार जलस्तर गिरने से नदियों पर संकट

वर्षा जल संचयन नहीं किया गया तो कुछ ही साल बाद गोमती नदी सूख सकती है। यह कहना है केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड के वैज्ञानिकों का। उनका कहना है कि लगातार जल स्तर गिरने से नदियों का पानी तेजी से घट रहा है। बोर्ड के वैज्ञानिक एके भार्गव ने बताया कि तराई क्षेत्रों से निकलने वाली गोमती जैसी अन्य नदियों में बेस फ्लो के चलते पानी रहता है। यानि छोटे-छोट नालों का पानी इन नदियों में गिरता है।

भू जल स्तर के घटने-बढ़ने के साथ नदियों का जल स्तर भी घटता बढ़ता है। ऊँचे भू जल स्तर वाले क्षेत्र में नदियों में पानी री-चार्ज होता है।बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक गोमतीनगर क्षेत्र में सबसे तेजी से भू जल स्तर गिर रहा है। यहाँ 1.6909 मीटर प्रति वर्ष जल स्तर नीचे जा रहा है। इसके बाद इंदिरानगर 1.1104, विकास नगर में 1.1351, नरही में 1.0587, कैंट में 1.0048 मीटर हर साल गिरावट आ रही है।

वहीं न्यू हैदराबाद, निरालानगर, रिवरबैंक कालोनी, सरोजनीनगर और अमीनाबाद क्षेत्रों में यह गिरावट एक मीटर के करीब है। श्री भार्गव का मानना है कि गोमती के कैचमेंट एरिया में यदि इसी तरह से जल स्तर गिरता रहा तो कुछ ही वर्षो में नदी सूख सकती है। यही कारण है कि पिछले साल सई नदी सूख गई थी।

केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड के निदेशक अबरार हुसैन का मानना है कि वर्षा जल संचयन के लिए शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में तो बहुत ही आसान तरीका है। गावों में सिर्फ सूख चुके तालाबों को विकसित करने की जरूरत है। 

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  • Web Title:जल संचयन नहीं हुआ तो सूख जाएँगीं नदियाँ