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17 फरवरी, 2020|9:20|IST

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अवैध रूप से चल रहे कोचिंग

बढ़ी हुई फीस के दंश से अभिभावक अभी उबर भी नहीं पाए थे, कि कोचिंग संचालकों के टयूशन फीस में बढ़ोतरी के फरमान ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। मजे की बात है कि बैगर रजिस्ट्रेशन के ही पढ़ा रहे ये प्राइवेट ट्यूटर्स छटवें वेतन आयोग का हवाला दे फीस बढ़ाने पर आमादा हैं। टयूशन फीस में 30 से 40 फीसदी इजफा कर दिया गया है। बिना रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण के चल रहीं इन दुकानों ने पैरेंट्स का दिवाला तो निकाल ही दिया है, मगर विभाग की नांक के नीचे हो रहे इस गौरखधंधे की खबर होते हुए भी उसने अपनी आंखे मूंद ली हैं।


गौरतलब है कि फायदे का धंधा देख जिले में कोचिंग सेंटरों की जैसे बाढ़ आ गई है। जिधर देखों कोचिंग सेंटर को बड़े-बड़े बोर्ड लटके दिखाई देते हैं। लेकिन रजिस्ट्रेशन के बगैर चल रहे इन कोचिंग संस्थानों ने लोगों का दिवाला निकाल रखा है। नवीनीकरण के बिना ही हजारों कोचिंग सेंटरों का चलना जारी है। साल 2002 से लेकर अब तक सिर्फ 48 सेंटर ने विभाग में नवीनीकरण के लिए अर्जी दी है।


टूयूटर्स का कहना है कि उन्हें कहीं से वेतन नहीं मिल रहा जिस पर छठां वेतन आयोग लागू हो। ट्यूशन की रकम ही उनका वेतन है, इसलिए पारिश्रमिक बढ़ाया गया है। दसवीं, बारहवीं के ट्यूशन के लिए पैरेंट्स को एक विषय के लिए 1500 से 2000 रुपये तक भरने पड़ रहे हैं। जबकि पहले यही फीस आठ सौ से एक हजार रुपये तक थी। फीस बढ़ाने के बारे में पूछने पर कैमिस्ट्री के टीचर संजय गुप्ता का कहना है कि हरचीज के दाम में बढ़ोतरी हुई है, जिससे उनका खर्च दुगना हो गया है। इस वजह से हमें मजबूरन रेट बढ़ाने पड़े हैं।

अंग्रेजी के शिक्षक अमिता सिंह कहते हैं कि कॉलेज के टीचर छठे वेतन आयोग का लाभ उठा रहे हैं तो हम अपनी आमंदनी में थोड़ा इजाफा कर रहे हैं इसमें कोई बुरी बात नहीं है। उधर डीआईओएस इस मामले पर चुप्पी साध लेते हैं। बीते साल अवैध रूप से चल रहे कोचिंगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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