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28 मई, 2020|9:20|IST

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पर्यावरण को श्रद्धांजलि

पर्यावरण दिवस आ गया। हम कुछ नहीं कर सकते। इसको लाने में हमारा किसी तरह का हाथ नहीं है। यह हर बार भरी गर्मी में आकर, उदास मन से वापस चला जाता है। बहुत सोचता हूं कि यह एक बार बरसात में आ जाए, लेकिन यह नहीं मानता। भयानक गर्मी, सूखा व अकाल के इस माहौल में, मेरे पास विनम्र श्रद्धांजलि प्रकट करने के अलावा कोई चारा नहीं है। मैं क्या कर सकता हूं, हरे-भरे पेड़ों के चित्र पर प्लास्टिक के फूल चढ़ाकर, दो मिनट का मौन धारण कर लेता हूं। लेकिन चुप भी कहां तक रहूं। वनों के भारी-भरकम आंकड़े मुङो अनवरत बोलने पर विवश कर देते है।

आंकड़ों के अनुसार हमारी भूमि पर नाना प्रकार के पेड़ विद्यमान हैं, किन्तु मुझ नासमझ को वे दिखाई नहीं देते। वातावरण में चारों ओर सुगंधित गैसें है। वे दिन गए जब हमें महक के लिए प्रकति पर निर्भर रहना पड़ता था। वैज्ञानिक प्रगति ने इस क्षेत्र में हमें आत्मनिर्भर बना दिया है। गली-मोहल्ले में छोटे-मोटे कारखाने, भट्ठियां तीव्रता से इसका उत्पादन कर रही है।

देश की नदियां रसायनिक रूप से अति समृद्ध हैं। नदियों में पानी कम, रसायन अधिक है। वनों की जगह खेतों ने ले ली है। खेतों की जगह मकान ले रहे हैं। अब मकानों का स्थान कौन लेगा? पता नहीं। पहाड़ कट रहे हैं, टीले कट रहे हैं, नदी के किनारे कट रहे हैं। सब ओर मिट्टी बह रही है। कटी हुइ मिट्टी के अवशेष, हेपरी मूर के शिल्प की भांति सुंदर व पिकासो के चित्र के समान मोहक प्रतीत होते है।

स्थिर तत्वों में वो सौन्दर्य कहां, जो चलायमान वस्तुओं में है। पर्यावरण शब्द तो महज सभाओं में सुनाई देने वाला शब्द है। पर्यावरण से मोहग्रस्त लोग एक जगह जमा होकर अपने-अपने विचार रखते हैं, कोई उन्हें सुनने तक नहीं आता। कुछ अच्छे-अच्छे शब्द, मनमोहक आंकड़े एवं भविष्य के कुछ सुंदर सपने। इसी तरह पर्यावरण दिवस सम्पन्न हो जाता हैं। जब सब कुछ अच्छा है, सुंदर है, खूबसूरत है, तो आपने शक्ल, उदास क्यों बना रखी है।

मुंह पर ‘रेडियोएक्टिव’ मुस्कराहट लाएं। साथ ही प्रण करें कि पर्यावरण की रक्षा के लिए दो हरे-भरे पेड़ों के चित्र कमरे में लगाएंगे। अगर कहीं एकाध बचा-खुचा पेड़ दिख गया तो मोबाइल के कैमरे से उसका फोटो खींचकर इंटरनेट पर अपलोड कर देंगे। दिन भर हरा चश्मा पहनकर उदास, बंजर व पीली धरती को निहारेंगे। आखिर पर्यावरण दिवस को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एक दिन सावन के अंधे बनने में क्या हर्ज है।

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  • Web Title:पर्यावरण को श्रद्धांजलि