DA Image
26 फरवरी, 2020|2:48|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गुदड़ी का लाल कर गया कमाल

मेधा की धमक ऐसी ही होती है। लोग देखते रह जते हैं, इतिहास रच जाता है। अब देहातों के अपेक्षाकृत कम चर्चित कॉलेजों के लो-प्रोफाइल छात्र ने 2009 की इंटर आर्ट्स की परीक्षा में मेरिट हासिल कर दिखा दिया कि हौसला ऊंचा हो, तो झोपड़ी के दीये में भी तूफान से लड़ने की ताकत आ जाती है। स्टेट टॉपर्स की लिस्ट में सबसे ऊपर जिस संजीत महतो का नाम चमक रहा है, वह राजधानी के चुटिया स्थित ग्रेट इंडिया लॉज में चलनेवाले मेस में कूक का काम रहता है।

मेस में छात्रों के लिए खाना बनाने के बाद रात साढ़े नौ बजे से दो बजे तक पढाई करता था। फिर सुबह पांच बजे उठकर आठ बजे तक मेस का कामकाज निपटाकर कॉलेज के लिए निकल पड़ता था। कई मौके ऐसे आये, जब उसकी पॉकेट में एक रुपया भी नहीं होता था। बंगाल के पुरुलिया जिले के मुरगुमा ग्राम के गरीब किसान खरीराम महतो का बेटा संजीत महतो दो साल पहले रांची आया था।

राजधानी की एक मिठाई दुकान में काम करनेवाले बड़े भाई ने उसे यहां मेस के काम में लगा दिया। उसने इंटर की पढ़ाई के लिए हटिया के आरएनटी कॉलेज में एडमिशन भी ले लिया। वह बताता है कि परीक्षा के चार महीने पहले से उसने हर रोज तकरीबन 12 घंटे जीतोड़ पढ़ाई की।

चप्पल जूते बेचकर बना कोल्हान का संकेंड टॉपर : जेएलएन कॉलेज का छात्र एवं इंटर कला में कोल्हान का सेकेंड टॉपर शत्रुघ्न महतो हाट बाजर में जूते चप्पल बेचकर इस मुकाम पर पहुंचा है। वह मनोहरपुर के घोर उग्रवाद प्रभावित पौसेता का रहनेवाला है। उसके पिता शशिभूषण महतो अब इस दुनिया में नहीं रहे।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:गुदड़ी का लाल कर गया कमाल