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सावधान! कहीं 109 में न फंस जाएं

रात के समय बेमकसद घूमने का शौक रखते हैं तो सावधान हो जाइए। हो सकता है पुलिसकर्मी आपको पकड़ लें और रेजीडेंट प्रूफ व अन्य जानकारियां पूछे। अगर बताने में जरा भी जुबान फिसली तो आईपीसी की धारा 109 के तहत सीधे अंदर भी जा सकते हैं। शहर में बढ़ रही चोरी व लूट की वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने रात को खास चौकसी बरतने का निर्णय लिया है।


कई माह से शहर में लुटेरों, स्नैचरों व चोरों ने उत्पात मचा रखा है। पुलिस के विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इन घटनाओं में पेशेवर गैंग के शामिल होने के अलावा अप्रवासी भी खूब घरों व कारों के लॉक चटकाने में आगे हैं। पिछले दिनों एक ऐसी घटना भी सामने आई थी, जहां कुछ युवक महज मौज मस्ती के लिए गाड़ी चुरा लेते थे। पेट्रोल खत्म होने पर गाड़ी को छोड़ दिया जाता था। इन सब घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस असामाजिक तत्वों को वारदात अंजाम देने से पहले ही दबोच लेने की योजना बना रही है। रात के समय सड़कों या गलियों पर आवारागर्दी करते युवकों को सबक सिखाने के लिए पुलिस नया अभियान छेड़ा है। अगर रात को कोई युवक संदिग्ध हालात में घूमता पाया गया और सवालों का सही तरह से जवाब नहीं दे पाया तो उसे हिरासत में ले लिया जाएगा। एसपी अमिताभ ढिल्लो ने इस बात की पुष्टि की है कि रात को आवारागर्द युवकों से कड़ी पूछताछ की जाएगी।

चोरी का माल पहुंचता है इंटरस्टेट
शहर में चोरी की वारदातों के बाद सामान की रिकवरी के लिए पुलिस पूरा जोर लगाती है लेकिन उसके बाद भी रिकवरी रिपोर्ट शत-प्रतिशत नहीं हो पाती। सूत्रों का कहना है कि अधिकांश छोटी मोटी चोरियों में माइग्रेंट लोगों का ज्यादा हाथ रहता है। ये चोरी करने से पहले ही अपने रिश्तेदारों को दूसरे राज्यों से बुला लेते हैं और चोरी की वारदात को अंजाम देते ही सामान उनके सुपुर्द कर देते हैं। सामान लेकर वे तुरंत गाड़ी पकड़ लेते हैं। सूत्रों का कहना है कि कई मामले तो ऐसे भी सामने आए, जहां चोरी की वारदात के दो तीन दिन के भीतर ही चोर पकड़ा गया, लेकिन जब सामान रिकवर करने की कोशिश की गई तो पता चला कि चोरी का माल दूसरे राज्यों में पहुंच चुका है। पुलिस उनके बताए एड्रेस पर पहुंचती है, लेकिन वहां के गांव में पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगता।

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