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भेदभाव के खिलाफ

रॉयल मेलबोर्न हॉस्पिटल के बाहर रविवार को हुए भारतीय छात्रों के प्रदर्शन से आस्ट्रेलियाई सरकार के कानों पर कोई जूं रेंगी होगी या नहीं, यह कहना अभी मुश्किल है। पिछले काफी समय से जिस तरह से आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हमले बढ़ रहे हैं और वहां की सरकार लगातार इस पर लीपापोती कर रही है, उसे देखते हुए यह उम्मीद तो नहीं ही की ज सकती कि धरने प्रदर्शन की गांधीगिरी तुरंत कोई बड़ा असर दिखा पाएगी। हां इससे आस्ट्रेलिया के उदार सोच रखने वाले एक बड़े तबके की हमदर्दी जरूर भारतीय छात्रों को हासिल हो जाएगी। उस तबके की जो भारतीय छात्रों की पीड़ा को न समझ पाने के कारण अभी तक इसे बहुत बड़ी समस्या के रूप में नहीं देख रहा था। इसे भुक्तभोगी भारतीय छात्र भी अच्छी तरह समझते हैं कि समस्या काफी गंभीर और गहरी है, जिसके समाधान के लिए एक साथ कई स्तरों पर सक्रिय होना जरूरी है। आस्ट्रेलिया में जो हो रहा है वह उदाहरण है कि ग्लोबलाइजेशन की वकालत करना तो आसान है, लेकिन उसके लिए समाज में दूसरी संस्कृतियों और उसके लोगों के लिए जिस सहनशीलता और धैर्य को विकसित करने की जरूरत है, वह शुरूआत विकसित देशों में भी नहीं हुई है। साथ ही प्रशासन को जिस तरह से सक्रिय किया जाना जरूरी है, वह भी कहीं नहीं दिख रहा है। आस्ट्रेलिया के पुलिस प्रशासन ने आमतौर पर इस तरह की घटनाओं को नजरंदाज ही किया है। आस्ट्रेलिया में भारतीयों के मौखिक अपमान के लिए करी बैशिंग की जो गलत परंपरा शुरू हुई थी, उसने अब अगर आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है तो पूरे समाज के साथ ही प्रशासन और सरकार को भी दोषमुक्त नहीं किया ज सकता। मसले को भारत और आस्ट्रेलिया की सरकारों के बीच भी जोरदार तरीके से उठाने की जरूरत है। तमाम विकसित देश विकासशील देशों पर लगातार यह दबाव डालते रहे हैं कि ग्लोबलाइजेशन की राह में बाधा बनने वाले कानूनों और रवयों को खत्म किया जाए। अब मौका है कि ऐसा दबाव आस्ट्रेलिया जसे देशों पर भी बनाया जाए।

हमारे पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि पूरा आस्ट्रेलियाई समाज ही भारतीयों का विरोधी है और उनके प्रति आक्रामक है। निश्चित रूप से यह कुछ उग्र तत्वों का ही काम होगा, बहुत मुमकिन है कि आम आस्ट्रेलियाई इसे नापसंद भी करता हो। लेकिन फिर भी ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करना और भारतीय छात्रों की सुरक्षा करना आस्ट्रेलिया की सरकार का दायित्व है। इसके लिए उस पर हर तरह से दबाव बनाया जाना जरूरी है।

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  • Web Title:भेदभाव के खिलाफ
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दूसरा टी-20 अंतरराष्ट्रीय
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