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प्रभावी इंटरव्यू

किसी भी इंटरव्यू में दो पक्ष होते हैं- एक, नौकरी चाहने वाला उम्मीदवार और दूसरा, भावी नियोक्ता। लेकिन विचित्र किंतु सत्य बात ये है कि इंटरव्यू में पलड़ा दूसरे पक्ष का ही भारी होता है। इसकी वजह है, मंदी की वजह से कम होती जा रही नौकरियां। इसलिए समझदारी इसी में है कि इंटरव्यू का मौका मिलते ही अपना अच्छे से अच्छा इम्प्रैशन छोड़ा जए।

भय और उत्तेजना
अगर इंटरव्यू का बुलावा ऐसे पद के लिए आया है, जिसे आप तबियत से हासिल करना चाहते हैं, तो आप उत्तेजित और उमंग से लबालब महसूस करेंगे और अगर प्रतिस्पर्धा कड़ी है और आपको नौकरी की सख्त जरूरत है, तो आपको ये सोचकर डर लग सकता है कि कहीं नौकरी के लिए रिजेक्ट ना हो जाएं। बहरहाल, अगर आप नियोक्ता के नजरिए को समझ सकें और इंटरव्यू के तीन अहम चरणों की तफ़सील जन लें, तो काफी आसानी रहेगी।

तीन पायदान
-इंटरव्यू का पहला पायदान है बुलावा। अगर नियोक्ता आपको जॉब के लायक समझता है, तो इंटरव्यू के लिए बुलाता है। और अगर आपका सीवी देखकर उसे लगता है कि आप संबंधित काम नहीं कर पाएंगे, तो वह आपको कॉल नहीं करेगा। इस चरण में कामयाबी पाने के लिए आपको एक बेहद चुस्त-दुरुस्त सीवी बनाना चाहिए, जिसमें विज्ञापित पद से जुड़ी आपकी सभी योग्यताएं स्पष्टत: उभर कर सामने आएं। ये भी ध्यान रखें कि सीवी में आपकी योग्यता विज्ञापित पद के हिसाब से बहुत ज्यादा भी न हो।

- इंटरव्यू का दूसरा पायदान है - प्रत्यक्ष साक्षात्कार या मीटिंग। ध्यान रखें, इंटरव्यू के दौरान नियोक्ता आपको देखकर ये बातें सोचता है- क्या ये व्यक्ित मुङो पसंद है, क्या ये सामान्य है, क्या ये बाकी स्टाफ से पटरी बैठाकर चल पाएगा, क्या ये तेजी से चीजों को अपनी पकड़ में ले पाएगा, और क्या ये कंपनी को बेहतरीन योगदान दे पाएगा।

- इसके बाद बारी आती है फॉलो-अप की। इंटरव्यू के बाद नियोक्ता कुछ उपयुक्त उम्मीदवारों को छांट लेता है। ये सभी ठीक होते हैं, लेकिन जॉब उसी को मिलता है, जो फॉलो-अप के दौरान अपनी उत्कट इच्छा का प्रदर्शन करने में सफल रहता है।

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