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सिलिकॉन

सिलिकॉन पृथ्वी पर ऑक्सीजन के बाद सबसे अधिक पाया जाने वाला तत्व है। सिलिकॉल और सिलिकॉन के यौगिक सर्किट, साबुन और शीशे के अतिरिक्त सबसे अधिक कंप्यूटर चिप्स में इस्तेमाल किए जाते हैं। इसी कारण अमेरिका की कंप्यूटर जगत के केंद्र को सिलिकॉन वली का नाम दिया गया है।

सिलिकॉन 1824 में स्वीडन के रसायनशास्त्री जोंस जकब बज्रेलियस ने खोज था। आवर्त सारिणी में इसे 14वें स्थान पर रखा गया है। इसे अंग्रेजी शब्दों ‘एसआई’ से इंगित किया जता है। सिलिकॉन यौगिकों, जसे कि सिलिकॉन कारबाइड (एसआईसी) को उनकी अनोखी विशेषताओं के लिए इस्तेमाल किया जता है। कठोरता में यह हीरे के बराबर है।

जब सिलिकॉन को अन्य तत्वों के साथ मिलाया जता है तो उसे सिलिकेट कहते हैं। सिलिकेट्स प्रचुर मात्रा में पाए जते हैं और इन्हें अनेक औद्योगिक कार्यो के लिए इस्तेमाल में लाया जता है। इनकी अन्य रासायनिक यौगिकों के साथ क्रिया कराई जती है ताकि यह अपने सिलिकॉन तत्व अलग करें या अन्य तत्वों के साथ विभिन्न कार्यों के लिए क्रिया कर सकें। धातु के साथ क्रिया कराने पर यह उस धातु की कठोरता और मजबूती बढ़ा देता है। अनेक उद्योग उत्पादों को मजबूत और स्थाई बनाने के लिए सिलिकेट्स का इस्तेमाल करते हैं।

कई लोग इसे ‘सिलिकोन’ ही समझने की गलती करते हैं। सिलिकॉन में सिलिकोन के तत्व तो होते हैं और यह इसकी कई खनिजीय विशेषताएं भी होती हैं। इन्हें अन्य रासायनिक यौगिकों के साथ गर्म कर क्रिया कराई ज सकती है। नॉन-स्टिक उपकरण, बिजली उत्पादों के शील्ड  सिलिकोन से बनते हैं। यह लचीला यौगिक है।

सिलिकॉन की प्रचुरता के कारण इसका आम इस्तेमाल होता है। चीन और अमेरिका जसे देश इसका अधिकाधिक उत्पाद करते हैं। निर्माता इसके उपयोगी इस्तेमाल के नए तरीकों की लगातार खोज में हैं जिस कारण इसका इस्तेमाल लगातार होते रहने की संभावना है।

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