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जनता के असली हीरो ..

महाराष्ट्र जब जल रहा था, तब सरकार को नपुंसक कहने वाले कहां दुबक रहे थे? नपुंसक तो वे हैं, जो मासूम टैक्सी वालोंे को बेरहमी से मारते हैं और आतंकवादियों के सामने से दुम दबाकर भाग जाते हैं। डींगें हांकने से, तोड़-फोड़ करने से आम आदमी प्रभावित नहीं होता, ‘बल्कि ऐसे लोगों से नफरत करने लगता है। जनता को ऐसी शख्सियतों को सिरे से नकार देना चाहिए।’ जनता के असली हीरो वे लोग हैं, ‘जो सीना तान कर आतंक का मुकाबला करने आगे आये इनमें एक बुजुर्ग बिहारी कांस्टेबल भी शामिल है।’
अभिलाषा, नई दिल्ली

पब्लिक सब जनती है

‘दीदी’ यानी ममता बनर्जी को रेल मंत्री पद प्राप्त करने की बधाई। पर बीस रुपये में मासिक 500/- पाने वाले व्यक्ित को, मासिक पास देने की बात समझ में नहीं आयी, जो व्यक्ित दैनिक मजदूर, 16-17 रुपये रोज कमाता है, वह 100 किलोमीटर दूर क्यों जयेगा? वह रु. 500/- प्रतिमाह प्राप्त करने का प्रमाण पत्र कहां से लायेगा? हां, इस सुविधा का लाभ रु. 5000/- तक प्राप्त करने वाले तेज  लोग जरूर उठायेंगे। आप विलो पावर्टी लाईन वालों को ये सुविधा दे सकते हैं। उनके पास ‘बीपीएल’ कार्ड  हैं। कृपया जनता को बेवकूफ बनाने की कोशिश न करें। 
यू. सी. पाण्डेय, द्वारका, नई दिल्ली

.. और पंजब झुलस गया

वियना से उठे धुंए ने समूचे पंजब को झुलसा दिया है। अब इसकी तपिश से उठा सवाल यह है कि क्या जिस जतिविहीन समाज की स्थापना के लिए सिख धर्म की नींव रखी गयी, आज उसके अपने ही एक दूसरे को मारने-काटने पर आमादा हो गये हैं। यह कब तक चलेगा। 
अनूप प्रकाश वर्मा, जमिया

विएना की आग

विएना के एक गुरुद्वारे में हुए हमले में गुरुद्वारे का एक संत गोली का शिकार होकर शहीद हो गया। भारत से हजरों मील दूर घटी इस घटना का विरोध करने के लिए पंजब में अनेक स्थानों पर शिक्षित-अशिक्षित लोगों के समूह ने हिंसा का जो ताण्डव किया वह अक्षम्य है। अनेक लोगों की जनें चली गईं। कितने लोगों को कफ्यरू के कारण परेशानी ङोलनी पड़ी। समझ में नहीं आता कि विरोध के नाम पर अपने ही लोगों का खून बहाना अपने ही देश की संपत्ति को फूंकना, कहां की बुद्धिमानी है। ऐसे उपद्रवी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आगे ऐसी घटनाएं न हों।
इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैंप दिल्ली

बीवी की सही बात मानो

अगर संस्कारहीन बीवी मेरे माता-पिता को त्याग कर पीहर में बसने को कहे तो क्या पति अपने माता-पिता को छोड़ दे? बीवी घर की धड़कन है, मां घर की आत्मा। दोनोंे ही घर की सुख शांति समृद्धि विकास के लिए आवश्यक हैं।
 शिव प्रकाश शर्मा, हापुड

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