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युद्ध के बाद

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में श्रीलंका सरकार के खिलाफ जाच की मुहिम को भारत, पाकिस्तान और चीन ने रुकवाया है। दूसरी ओर ब्रिटिश अखबार ‘द टाइम्स’ ने खबर छापी है कि लिट्टे के खिलाफ कार्रवाई के दौरान लगभग बीस हजर श्रीलंकाई तमिल नागरिक मारे गए। इस वक्त विश्व जनमत दो हिस्सों में बंटा हुआ है।

एक ओर यूरोपीय देश हैं, जो श्रीलंका सरकार के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बनाना चाहते हैं, दूसरी ओर भारत, चीन, पाकिस्तान, रूस आदि देश हैं, जो श्रीलंका सरकार का समर्थन कर रहे हैं। यहां तक कि श्रीलंकाई राष्ट्रपति म¨हदा राजपक्षे यह कह चुके हैं कि श्रीलंका ने भारत की लड़ाई लड़ी है। पिछले लंबे वक्त से भारत श्रीलंका में अपना काफी प्रभाव खो चुका है।

भारतीय शांति सेना की मुहिम और फिर राजीव गांधी की हत्या के बाद लिट्टे से भारत ने कोई रिश्ता नहीं रखा था। दूसरी ओर श्रीलंका सरकार को भी भारत से कोई मदद नहीं मिल रही थी। श्रीलंका ने ऐसे में चीन और पाकिस्तान से सैनिक सहायता प्राप्त की और उनका प्रभाव इस क्षेत्र में बढ़ गया। भारत की मजबूरी यह है कि अगर इस वक्त वह श्रीलंका सरकार का समर्थन नहीं करता है तो श्रीलंका पूरी तरह चीनी प्रभाव क्षेत्र में चला जएगा।

दूसरे, आतंकवाद से लड़ता हुआ भारत किसी दूसरे देश की आतंकवाद विरोधी मुहिम का विरोध नहीं कर सकता। लेकिन यह भी सच है कि श्रीलंका के तमिलों की तकलीफों से भारत आंखें मूंदे नहीं रह सकता, इसलिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल वह पुनर्वास में मदद और तमिल समस्या के राजनैतिक समाधान के लिए दबाव डालने में कर रहा है।

कुछ मुश्किल इस वजह से भी हुई कि पिछले दिनों भारत में लोकसभा चुनाव हुए और राजनैतिक अनिश्चितता की वजह से श्रीलंका मुद्दे पर भारत सक्रिय नहीं हो पाया। लेकिन अब भारत को यह जता देना चाहिए कि श्रीलंका ने जो रणनीति अख्तियार की है, उससे भारत खुश नहीं है और खासतौर पर निदरेश तमिल नागरिकों के साथ जसा बरताव श्रीलंका सरकार कर रही है, वह भारत जसे लोकतांत्रिक देश की मान्यताओं के खिलाफ है।

पिछले लंबे अर्से से निष्क्रियता की नीति की वजह से हमने श्रीलंका पर अपना प्रभाव काफी खोया है, लेकिन अब भी श्रीलंका को सबसे ज्यादा प्रभावित करने की क्षमता हमारी ही है। भारत को यह कह देना चाहिए कि उसकी अपनी लड़ाई वह लड़ सकता है और उसके लिए श्रीलंकाई सेना की जरूरत नहीं है। लिट्टे के आतंकवाद के हम खिलाफ थे, लेकिन तमिल नागरिकों के हम साथ हैं।

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