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आठवें राष्ट्रीय सम्मेलन में नि:शक्तजन क्रियान्वयन में यूपी को तीसरा स्थान

उत्तर प्रदेश को विकलांगता के क्षेत्र में किए गए सराहनीय कायरें तथा सातवें राष्ट्रीय सम्मेलन में की गई संस्तुतियों को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने के लिए पूरे देश में वर्ष 2008-09 के लिए तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। यह जानकारी प्रमुख सचिव विकलांग कल्याण शैलेश कृष्ण ने रविवार को यहाँ दी।

उन्होंने बताया कि गत वर्ष 16-17 दिसम्बर, 2008 को नई दिल्ली में सम्पन्न हुए देश के सभी राज्यों के आयुक्त, विकलांगजन के आठवें राष्ट्रीय सम्मेलन में नि:शक्तजन (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 के क्रियान्वयन तथा सातवें राष्ट्रीय सम्मेलन की संस्तुतियों की समीक्षा के आधार पर उत्तर प्रदेश को यह गौरव प्राप्त हुआ है।

प्रमुख सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री मायावती ने विकलांगजन के कल्याण के लिए अपने पहले कार्यकाल के दौरान अलग से विकलांग कल्याण विभाग का गठन किया था। अपने हर कार्यकाल में उन्होंने विकलांगजन के लिए तमाम योजनाएं तैयार कराई और उनका प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन भी सुनिश्चित कराया। इस बार चौथी बार सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री ने विकलांगजनों के शैक्षिक व आर्थिक उत्थान तथा आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कदम उठाये हैं।

विकलांगजनों एवं दृष्टिबाधितों को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करने के लिए लखनऊ  में डॉ शकुन्तला मिÞा पुनर्वास विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है। गोरखपुर में दृष्टिबाधित बालिकाओं तथा मेरठ में बालकों के लिए इण्टर कालेज की स्थापना का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले दृष्टिबाधितों के लिए लखनऊ, इलाहाबाद, मेरठ तथा गोरखपुर में व छात्राओं के लिए लखनऊ  तथा गोरखपुर में छात्रावास की स्थापना की जा रही है।

विकलांग बन्धुओं को सभी श्रेणी की सरकारी बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा दी गयी है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में विकलांगों को दो प्रतिशत के स्थान पर तीन प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है। जिसमें से एक प्रतिशत आरक्षण दृष्टिबाधितों के लिए रखा गया है। इसके अतिरिक्त उनके हित में विभिन्न कार्यक्रम क्रियान्वित किये जा रहे हैं।

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  • Web Title:विकलांगों की बेहतरी में यूपी का अच्छा काम